एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

जासूसी गुब्बारों के बाद अब चीन ने सेटेलाईट से शुरू की अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जासूसी, मचा हड़कंप – नित्यानंद दूबे (स्पेशल एडिटर)


सांकेतिक तस्वीर।

बीजिंग/वॉशिंगटन। सेकेंड वर्ल्ड वाॅर के बाद अमेरिकी सैन्य बेस “पर्ल हार्बर” एक बार फिर से चर्चा में है। क्योंकि, दावा किया जा रहा है कि हाल में ही चीन ने तमाम अमेरिकी सैन्य ठिकानों की खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए उपग्रहों से दागे गए हरे रंग के लेजर का इस्तेमाल किया है। इस घटना को हवाई के एक द्वीप की पहाड़ की चोटी पर लगे लाइव स्ट्रीम कैमरे ने रिकॉर्ड कर लिया। यह कैमरा टेलीस्कोप से जुड़ा हुआ था। हवाई में अमेरिका का ज्वाइंट बेस पर्ल हार्बर हिकमैन भी स्थित है, जो प्रशांत महासागर में अमेरिकी नौसेना और वायु सेना का बड़ा सैन्य अड्डा है। इस सैन्य अड्डे को अमेरिका का फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस भी माना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने पर्ल हार्बर पर ही हमला किया था।

दरअसल,शुरू में यह माना गया था कि रोशनी नासा के एक उपग्रह से आई थी। बाद में हुई जांच में पता चला कि इस हरे रंग की रोशनी के पीछे एक चीनी प्रदूषण निगरानी उपग्रह डाकी-1 का हाथ था। इस घटना के बाद तुरंत सवाल उठने लगे कि हवाई में इतनी बड़ी संख्या में अमेरिकी सेना की उपस्थिति को देखते हुए चीन को यहीं पर प्रदूषण की निगरानी करना जरूरी क्यों लगा ? बता दे कि यह घटना चीनी जासूसी गुब्बारे को अमेरिका में मार गिराने के कुछ हफ्ते बाद की है। अमेरिका ने चीनी गुब्बारे को जासूसी उपकरण माना था,जबकि चीन का दावा था कि यह एक मौसम की जानकारी जुटाने वाला सिविलियन एयरशिप था।

चूंकि,पर्ल हार्बर अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है। यह यूनाइटेड स्टेट पैसिफिक फ्लीट और पैसिफिक एयर फोर्सेज का मुख्यालय भी है। मालूम हो कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय 7 दिसंबर 1941 को जापान ने इसी पर्ल हार्बर पर जबरदस्त हवाई हमला किया था। इसी हमले के कारण अमेरिका को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल होना पड़ा था। इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी सेना इसे अमेरिकी फौज को टारगेट के लिए बनाए गए उपग्रहों का इस्तेमाल सैन्य मिशन के लिए कर रहा है। आगे भी कहा गया कि डाकी-1 के लेज़र विशेष रूप से वातावरण के घनत्व की निगरानी करते हैं और हवा की विभिन्न दिशाओं का पता लगा सकते हैं। यह ठीक वही डेटा है जो चीन के लिए छोटे मल्टीपल रीएंट्री व्हीकल न्यूक्लियर वॉरहेड्स या हाल ही के हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वॉरहेड्स को सटीक रूप से टारगेट करने के लिए आवश्यक है।

बताया जा रहा है कि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वॉरहेड कम ऊंचाई पर आड़े-तिरक्षे उड़ते हैं। ऐसे में इनको इंटरसेप्ट करना और लक्ष्य का पता लगाना काफी मुश्किल होता है। यह प्रतिकूल मौसम में भी अपने लक्ष्य को आसानी से साध सकते हैं, बशर्तें उन्हें लक्ष्य के आसपास के मौसम का सटीक डेटा मिल जाए। ऐसे में चीन का डाकी-1 उपग्रह हाइपरसोनिक मिसाइल हमले के लिए मौसम का सटीक डेटा दे सकता है। कुल मिलाकर अब यह साफ हो चुका है कि चीन अपनी पूरी तैयारी के साथ अमेरिका के तमाम सैन्य ठिकानों की जासूसी पहले से कही अधिक कर रहा है,ताकि युध्द की परिस्थिति में बिना देर किये चीनी सेना दुश्मन को टारगेट कर सकें।

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