एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

अरूणाचल प्रदेश में दुश्मन के बार्डर के पास फिर क्रैश हुआ इंडियन आर्मी का हैलीकॉप्टर, शहीद हुए दोनों पायलट, सेना ने शुरू की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी – गौरव बरनवाल (डिप्टी एडिटर)


हादसे में शहीद हुए दोनों पायलट, फोटो साभार -(इंडियन आर्मी के ट्वीटर से)

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश की धरती से एक बार फिर से बुरी खबर सामने आई है,बताया जा रहा है कि चीन की सीमा के पास गुरुवार को इंडियन आर्मी के ईस्टर्न कमांड का चीता हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। जहां इस हादसे में हैलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट्स की मौत हो गई। दावा है कि यह दुर्घटना मंडला हिल्स इलाके में हुआ है,फिलहाल भारतीय सेना ने हादसे की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दे दिया हैं।


फाईल फोटो, साभार -(इंडियन आर्मी के ट्वीटर से)

इस बीच इंडियन डिफेंस के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले यह बताया गया है कि आर्मी एविएशन का चीता हेलिकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश के बोम्डियाल के पास ऑपरेशनल उड़ान पर था। इसी दौरान सुबह 9:15 बजे इसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया था। इस बीच भारतीय सेना ने हादसे में शहीद हुए दोनों पायलटों लेफ्टिनेंट कर्नल वीवीबी रेड्डी और मेजर जयंत ए.का फोटो ट्वीट कर जानकारी दे दी है।

वहीं,अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने भी कहा कि दोपहर करीब 12.30 बजे बंगजालेप, दिरांग थाने के ग्रामीणों ने सूचना दी कि एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। लिहाजा ITBP, सेना, एसएसबी और पुलिस की सर्च और बचाव टीम मौके के लिए रवाना हो गई थी। इससे पहले 21 अक्टूबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में मिलिट्री हेलिकॉप्टर ‘रुद्र’ क्रैश हो गया था। हादसा टूटिंग हेडक्वार्टर से 25 किलोमीटर दूर सिंगिंग गांव के पास हुआ था। हादसे में पांच की मौत हुई थी। रुद्र सेना का अटैक हेलिकॉप्टर है।

यही नहीं 5 अक्टूबर 2022 को भी अरूणाचल प्रदेश के तवांग में चीता हेलिकॉप्टर भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। जिसमें दो पायलट सवार थे। जहां हादसे के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनमें से लेफ्टिनेंट कर्नल सौरभ यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। ऐसे में चीनी बार्डर पर जिस तरह से बेहद शक्तिशाली कहे जाने वाले ये भारतीय हैलीकॉप्टर क्रैश हो रहे हैं, अपने आप में कई संभावित सवालों का जन्म लेना स्वभाविक हो जाता है। देखना दिलचस्प होगा कि ऐसे हादसों से निजात पाने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां कोई ठोस पहल करती है, या ऐसे ही कोर्ट आॅफ इंक्वायरी तक हीं सीमित रहती है ?

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