
गिराये गए चीनी गुब्बारे का समुद्र से मलबा बरामद करते हुए अमेरिकी नौसैनिक, फाईल फोटो।
बीजिंग/वॉशिंगटन। इस साल के बीते फरवरी में अमेरिका में गिराये गए चीन के जासूसी गुब्बारे की मलबों की जांच पूरी हो जाने की रिपोर्ट सामने आई है,जिसके आधार पर बेहद चौंकाने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। जिसमें यह कहा गया है कि यह जासूसी गुब्बारा कई संवेदनशील अमेरिकी मिलिट्री बेसेज से इंटेलीजेंस जुटाने में कामयाब रहा है। इतना ही नहीं यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी ऐजेंसियां इस जासूसी गुब्बारे को रोकने में नाकामयाब रह गईं।
बता दे कि अमेरिका के सीनियर अधिकारियों और बाइडेन प्रशासन के एक पूर्व सीनियर अधिकारी के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई है कि चीन के जासूसी गुब्बारे को संवेदनशील बैलेस्टिक मिसाइल साइट मोंटाना के ऊपर भी उड़ता हुआ देखा गया है। वहीं,इस पूरे मामले से चीन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि वह कोई जासूसी गुब्बारा नहीं है बल्कि एक मौसम संबंधी बैलून था,जिसे रिसर्च के लिए भेजा गया।
इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया कि चीन इस गुब्बारे को नियंत्रित कर सकता था। ऐसे में यह गुब्बारा कई ऐसी साइट्स से उड़ा है जो संवेदनशील हैं। इस गुब्बारे ने इन जगहों से जानकारियों को इकट्ठा किया और फिर रियल टाइम पर चीन को ये इंटेलीजेंस मुहैया कराईं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि जो इंटेलीजेंस चीन को मिली है वह ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स के जरिए भेजी गई है। इस इंटेलीजेंस को किसी भी हथियार सिस्टम या फिर कम्यूनिकेशंस सिस्टम से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए किसी भी तरह की तस्वीरों की कोई जरूरत नहीं होती है। अधिकारियों के मुताबिक जो अंदाजा लगाया जा रहा है, चीन ने शायद उससे कहीं ज्यादा जानकारियां हासिल कर ली हैं।
इससे साबित होता है कि जो गुब्बारा भेजा गया था उसकी सीमाएं आंकी नहीं जा सकती हैं। इस बीच पेंटागन का भी कहना है कि इंटेलीजेंस इकट्ठा करने के लिए चीन लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट का भी प्रयोग करने में सक्षम है।हालांकि,चीन ने बार-बार यही कहा कि यह गुब्बारा एक मानवरहित नागरिक जहाज था जो गलती से रास्ता भटककर अमेरिकी स्पेस में पहुँच गया था। मालूम हो कि फरवरी में गुब्बारे को अमेरिकी वायुसेना ने एफ-22 से इस गुब्बारे को ढेर कर दिया था। इसके बाद बाइडेन प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि गुब्बारा सिग्नल इंटेलीजेंस इकट्ठा करने में सफल था।
वहीं,अमेरिका के इस खुलासे से दुनिया के वें देश भी अब दबाव में आ सकते हैं जिनके यहां भी इसी तरह से चीन ने इन गुब्बारों से जासूसी किया था। इनमें जापान, ताइवान भारत समेत कई देश शामिल है। फिलहाल, इस ताजे खुलासे को लेकर अभी तक बीजिंग की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इतना ही नहीं दुनिया के वे तमाम देश भी अभी तक चुप है जो चीन के इस हरकत से प्रभावित हुए हैं।
