इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

पेंटागन से फिर लीक हुए खुफिया रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, रूस ने अरब के साथ अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ सीक्रेट मिशन को अंजाम देने के लिए किया है सीक्रेट डील – हेमंत सिंह (स्पेशल एडिटर)


अमेरिका के जंगी हैलीकॉप्टर से अमेरिकी सैनिक एक ड्रिल आॅपरेशन के दौरान,फोटो साभार-(यूस एअर फोर्स के ट्वीटर से)

रियाद/वाशिंग्टन। दुनिया की सबसे शक्तिशाली कहे जाने वाले अमेरिका का डिफेंस हाऊस “पेंटागन” इधर कुछ दिनों से अपने टाॅप सीक्रेट दस्तावेजों की रिपोर्ट्स के लीक होने के कारण चर्चा में बना हुआ है। जहां कथित रूप से लीक कुछ अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि रूस के खुफिया अधिकारियों ने तेल समृद्ध यूएई को अमेरिका व ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों के खिलाफ काम करने के लिए राजी कर लिया था। हालांकि,इन दस्तावेजों पर टिप्पणी करने से अमेरिकी अधिकारियों ने इन्कार कर दिया है। बता दे कि इससे पहले यूक्रेन जंग से भी जुड़ी कई गोपनीय जानकारियां इसी पेंटागन से लीक हुई थी।

वहीं,अरब देश ने इस खुलासे को झूठा बता कर खारिज किया है। यूएई का कहना है कि उसने रूस की खुफिया एजेंसी के साथ अपने रिश्ते गहरे नहीं किए हैं, लेकिन अमेरिका की चिंता इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि रूस और रूसियों पर यूक्रेन हमले को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों को यूएई नाकाम करने की कोशिश कर रहा है। दस्तावेज में ‘रूस/यूएई : खुफिया रिश्ते गहरे’ नामक नौ मार्च के एक शोध का हवाला दिया गया है। इस बीच अमेरिकी अधिकारियों ने दस्तावेज की प्रमाणिकता की पुष्टि से इन्कार किया है।

बता दे कि यूक्रेन जंग से जुड़े तमाम गोपनीय खुलासे होने के बाद अमेरिका के सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। जहां इस बीच पेंटागन ने भी माना है कि इन दस्तावेजों का लीक होना अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर खतरा माना है। अब ऐसे में सऊदी और रूस के बीच सीक्रेट डील की रिपोर्ट सामने आने पर अमेरिका और नाटों की चिंताएं बढ़ा दिया है। कहने को भले ही सऊदी इन खुलासों को खारिज करता दीख रहा है, लेकिन हाल की कई घटनाओं जैसे सऊदी का ईरान के साथ जाना और चीन के साथ नजदीकी होना तथा हूती विद्रोहियों के साथ बातचीत करना इतना ही नहीं हाल ही में रूस का एक युद्धपोत भी सऊदी अरब के साथ पहुंचा है जो कि अभी भी इसी इलाके में मौजूद है। ऐसे में ये तमाम घटनाक्रम साबित करते हैं कि सऊदी अरब अब रूस-चीन,ईरान गठबंधन की तरफ आकर्षित हो रहा है। जो कि अमेरिका और नाटों के साथ-साथ इजरायल के लिए भी बेहद चिंताजनक है।

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