
एक ड्रिल के दौरान नाटों के जंगी पोत और चाॅपर,फोटो साभार -(नाटों के ट्वीटर से)
ब्रसेल्स/टोक्यो। एक तरफ नाटों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए रूस पिछले एक साल से अधिक यूक्रेन के खिलाफ जंग छेड़े हुआ है तो वहीं दूसरी ओर अब उत्तर कोरिया और चीन के खिलाफ नाटों ने जापान के टोक्यो में एक संपर्क कार्यालय खोलने की योजना बना रहा है। बता दे कि यह एशिया में नाटों का अपनी तरह का पहला कार्यालय होगा। यह स्टेशन नाटों को जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे प्रमुख भागीदार देशों के साथ समय-समय पर परामर्श करने में सुविधा प्रदान करेगा। क्योंकि इन सभी देशों को चीन,उत्तर कोरिया और रूस की बढ़ती ताकत से खतरा है। ऐसे में अमेरिका के करीबी समझे जाने वाले ये चारों देश इंडो-पैसिफिक की चुनौतियों को नाटो के साथ मिलकर सामना कर पाएंगे।
बता दे कि नाटों और जापान इसी साल 11 और 12 जुलाई को लिथुआनिया के विलनियस में नाटों शिखर सम्मेलन से पहले एक व्यक्तिगत भागीदार कार्यक्रम पर भी हस्ताक्षर करने वाले हैं। इससे जापान और नाटो साइबर खतरों से निपटने में अपने सहयोग को और ज्यादा मजबूत करेंगे और खतरनाक तकनीकों, प्रॉपगैंडा जैसे खतरों के खिलाफ लड़ेंगे। इससे पहले
इसी साल जनवरी के अंत में नाटों महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने जापान की यात्रा की थी। इस दौरान टोक्यो में प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा के साथ मुलाकात में स्टोलटेनबर्ग ने जापान में नाटों कार्यालय खोलने का प्रस्ताव रखा था। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि जापान में नाटो का ऑफिस खोलने पर सदस्यों की रजामंदी ली गई थी। मालूम हो कि नाटों के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में, वियना में यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन के साथ-साथ जॉर्जिया, यूक्रेन, बोस्निया और हर्जेगोविना, मोल्दोवा और कुवैत में भी इसी तरह के संपर्क कार्यालय हैं।
वहीं,नाटों के इस कदम की रिपोर्ट सामने आने के बाद बीजिंग और उत्तर कोरिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। जबकि उत्तर कोरिया हमेशा अपने दुश्मन के खिलाफ आग उगलता रहा है। फिलहाल, नाटों का यह निर्णय दुश्मन को कितना प्रभावित कर सकता है ? यह अभी कह पाना थोड़ा मुश्किल है।
