
भारतीय जवान,सांकेतिक तस्वीर।
वाशिंग्टन। पिछले कुछ महिनों से पाकिस्तान,कनाडा और अमेरिका में भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के मारे जाने की रिपोर्ट लगातार सामने आ रही है। भारत विरोधी ये आतंकी चाहें पाकिस्तान में छिपे हों या अमेरिका अथवा कनाडा में,कहीं भी इनकी खैर नहीं है। अधिकतर मामलों में इन आतंकवादियों की मौत अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में हो रही है। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं,जो सड़क हादसे में भी मारे जा रहे हैं। इसी लिस्ट में ताजा नाम सिख फॉर जस्टिस के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू का भी जुड़ा है।
दरअसल,पिछले कुछ महिनों में न सिर्फ पाकिस्तानी आतंकी बल्कि खालिस्तानी आतंकियों की भी मौत का सिलसिला शुरू हुआ है,जो रुकने का नाम नहीं ले रहा। अब इसी कड़ी में ताजा नाम सिख फॉर जस्टिस के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू का जुड़ गया है। दावा किया जा रहा है कि पन्नू अमेरिका में हाईवे 101 पर हुए एक कार दुर्घटना में मारा गया है। इससे पहले खालिस्तान टाइगर फोर्स का चीफ परमजीत सिंह पंजवार उर्फ मलिक सरदार सिंह, उसके बाद कमान संभालने वाला हरदीप सिंह निज्जर और भारतीय दूतावास पर हमला करने वाले खालिस्तानी आतंकवादी अवतार सिंह खांडा की भी मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, कश्मीर में आतंकवाद फैलाने वाले हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर बशीर मीर उर्फ इम्तियाज आलम और जैश एक मोहम्मद के टॉप आतंकी जहूर मिस्त्री की भी हत्या हो चुकी है। बता दे कि ये सभी आतंकी भारत में मोस्ट वांटेड थे।
दावा किया जा रहा है कि खालिस्तानी आतंकवादी और सिख फॉर जस्टिस का सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका में कार दुर्घटना में मारा गया है। उसे भारत सरकार ने 2020 में ही आतंकवादी घोषित कर दिया था। उसके खिलाफ पंजाब में राजद्रोह के दो मामले में भी दर्ज हैं। पन्नू सोशल मीडिया पर अक्सर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता था। वह अपने खालिस्तान के सपने दिखाकर लोगों को भड़काता था। इसका बनाया आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भारतीय दूतावासों, नागरिकों और मंदिरों पर हमले में शामिल था। पन्नू को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से पंजाब में हिंसा भड़काने के लिए फंड मिलता था।
वहीं,इस तरह से भारत विरोधी आतंकियों की मारे जाने संबंधी रिपोर्ट्स को लेकर दुनिया भर के तमाम मीडिया समूह इसे संबंधित इंटेलीजेंस ऐजेंसियों का सीक्रेट मिशन से जोड़ कर देख रहे हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि इजरायली खुफिया ऐजेंसी “मोसाद” की तर्ज पर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। क्योंकि,मोसाद का इतिहास रहा है कि वह अपने दुश्मनों को इसी तरह से किनारे लगाती रही है। ऐसे में इन संभावित संभावनाओं को प्रथम दृष्टया बल मिलता दीख रहा है। हालांकि,इन घटनाओं पर दुनिया के किसी भी देश ने अब तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है, यहां तक की नई दिल्ली भी हमेशा की तरह इस ताजे घटनाक्रम पर भी खामोशी साध रखी है।
