
पाकिस्तानी पुलिस फोर्स,साभार -(सोशल मीडिया)
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को कोर्ट के फ़ैसले के बाद लाहौर स्थित उनके आवास ज़मान पार्क से गिरफ़्तार कर लिया गया है। दरअसल,इस्लामाबाद के जिला एवं सत्र न्यायालय ने इमरान ख़ान को तोशाखाना मामले में दोषी पाते हुए उन्हें तीन साल जेल की सज़ा सुनाई है, साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
वहीं,इमरान ने उन पर लगे आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वो इस फैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे।
इस बीच अपनी गिरफ़्तारी के बाद इमरान ख़ान का एक वीडियो बयान सामने आया,जिसमें उन्होंने समर्थकों से ‘चुप न बैठने’ की अपील की है। बता दे कि इससे पहले भी मई में इमरान ख़ान को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी लेकिन उस वक्त उनके समर्थकों उन्हें पुलिस कस्टडी से दूर रखने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। जहां इस दौरान पूरे देश भारी बवाल और हिंसा हुई थी,इतना ही पाकिस्तानी फौज का रावलपिंडी हेडक्वार्टर्स भी इस हिंसा की भेंट चढ़ गया था।
हालांकि बाद में उन्हें ये कहते हुए रिहा कर दिया गया कि उनकी गिरफ्तारी ग़ैर-क़ानूनी है।
यही कारण है कि शनिवार को इमरान खान की जैसे ही गिरफ्तारी हुई उसके तुरंत बाद ही इस्लामाबाद पुलिस के प्रवक्ता के हवाले से यह दावा किया गया कि इमरान ख़ान से जुड़े मामले की सुनवाई के मद्देनज़र राजधानी इस्लामाबाद में हाई अलर्ट जारी किया गया है और सुरक्षा के बेहद कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। इसी कड़ी में आगे भी बताया गया कि
सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वो अपने क्षेत्रों में रहें। शहर के सभी इलाक़ों में चेकिंग बढ़ा दी गई है। शहर में यातायात सामान्य रूप से चल रहा है। नागरिकों को किसी भी गतिविधि की सूचना पुलिस को कॉल 15 पर देनी चाहिए।
वहीं,इमरान ख़ान का एक वीडियो उनके सोशल मीडिया हैंडल पर डाला गया है जिसमें वो कहते हैं कि “मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है इसलिए गिरफ्तार होने से पहले मैंने ये संदेश आपके लिए रिकॉर्ड किया है।” इस वीडियो में इमरान ख़ान कहते हैं, “जब तक मेरा ये संदेश आप तक पहुंचेगा मुझे गिरफ्तार किया जा चुका होगा और मैं जेल में होउंगा। मेरी आपसे अपील है कि आप अपने घरों में चुप हो कर मत बैठना, मैं ये आपके लिए कर रहा हूं और आपके बच्चों के भविष्य के लिए कर रहा हूं।” इस विडियो में इमरान आगे भी यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि “अगर आप अपने हक़ों के लिए नहीं खड़े होंगे तो आप ग़ुलाम बन जाएंगे और ग़ुलाम ज़मीन पर चींटियों की तरह होती हैं। पाकिस्तान एक ख़्वाब का नाम था, हम किसी इंसान के सामने नहीं झुकते। ये इंसाफ़ की जंग है, आपके हक़ों की जंग है, आपकी आज़ादी की जंग है। तब तक आपको लड़ते रहना जब तक आपको अपना हक़ नहीं मिलता।” उन्होंने पश्चिमी मुल्कों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि “आपको वोट के ज़रिए ये लड़ाई लड़नी है जो कि आपका मूल अधिकार है। कोई और मुल्क इस देश पर कब्ज़ा न कर सके, जैसा कि आज बैठ गए हैं।”
दरअसल, पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने कहा था कि इमरान ख़ान ने सत्ता में रहते हुए तोशाखाना से जो तोहफ़े लिए थे, उसके बारे में अधिकारियों को उन्होंने सही जानकारी नहीं दी। हालांकि,इमरान ख़ान इन आरोपों को ग़लत बताते रहे हैं।
चूंकि,इमरान ख़ान पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए क़ीमती तोहफ़े अपने फ़ायदे के लिए बेचे। इमरान ख़ान ने चुनाव आयोग को दी गई अपनी संपत्ति की घोषणा में उसका ब्योरा नहीं दिया था। जहां बाद में चुनाव आयोग ने ज़िला अदालत में शिकायत दर्ज कराया था कि प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान ख़ान को जो गिफ़्ट मिले उसे उन्होंने बेच दिया और इस मामले में उन्हें आपराधिक क़ानूनों के ज़रिए सज़ा दी जाए। आरोप है कि इमरान ख़ान ने प्रधानमंत्री रहते हुए तोशाखाना के मंहगे गिफ़्ट, घड़िया अपने फ़ायदे के लिए बेची थीं।
मालूम हो कि वर्ष 1974 में पाकिस्तान में तोशाखाना स्थापित किया गया था। ये कैबिनेट डिवीज़न के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक सरकारी विभाग है जहां देश के प्रमुखों, मंत्रियों, नौकरशाहों, सासंदों को विदेशी सरकार या अधिकारियों की ओर से मिले मंहगे गिफ़्ट रखे जाते हैं। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या दूसरे बड़े अधिकारियों को किसी यात्रा के दौरान मिलने वाले क़ीमती तोहफों को भी रखा जाता है। तोशाखाना में रखी गई चीज़ों को स्मृति चिन्ह की तरह देखा जाता है। यहां रखी हुई चीज़ों को कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद ही बेचा जा सकता है। इन तोहफों में आमतौर पर महंगी घड़ियां, सोना और हीरे के गहने, क़ीमती सजावट का सामान, स्मृति चिन्ह, हीरा जड़ी कलम, क्रॉकरी और कालीन शामिल होते हैं।
