
इजरायल की मदद में अमेरिका ने अपने एअरक्राफ्ट कैरियर को भेजा है। फोटो साभार -(सोशल मीडिया)
तेल अवीव/अंकारा। एक दिन पहले दुनिया के लिए एक अभेद्य किले के रूप में मशहूर जिस इजरायल के सभी सुरक्षा-व्यवस्था को जिस तरह से हमास के आतंकियों ने धता बताते हुए सरप्राइज अटैक को अंजाम दिया,पूरी दुनिया सन्न रह गयी। जहां इस हमले की साजिश के तार नाटों सदस्य देश तुर्की के साथ जुड़ता नजर आ रहा है। जो कि इजरायल के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात हुआ,क्योंकि हाल ही में आर्मेनिया के खिलाफ अजरबैजान के साथ इजरायल और तुर्की के साथ-साथ पाकिस्तान भी कंधे से कंधे मिलाकर जंग लड़ रहा था। अब उसी तुर्की ने इतना बड़ा धोखा दिया।
दरअसल,फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेटिक (FDD) की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि इजरायली सीमा अधिकारियों ने 14 सितंबर को खुलासा किया था कि उनके एजेंटों ने जुलाई में तुर्की से गाजा पट्टी के रास्ते में 16 टन विस्फोटक सामग्री रोकी थी। इजरायली टैक्स अथॉरिटी के प्रवक्ता के अनुसार, अश्दोद में सीमा शुल्क एजेंटों ने दो कंटेनरों का निरीक्षण किया, जिनमें 54 टन जिप्सम होना चाहिए था। जब लैब में इस सामग्री का परीक्षण किया गया तो पता चला कि कंटेनर में रखे कुछ बैगों में अमोनियम क्लोराइड था। अमोनियम क्लोराइड का इस्तेमाल रॉकेट के लिए विस्फोटक बनाने में किया जाता है।
बता दे कि हाल के कुछ वर्षों में इजरायल के साथ संबंध सामान्य होने के बावजूद भी तुर्की ने आतंकवादी संगठन हमास का समर्थन किया है। तुर्की अपने बैंकों के माध्यम से हमास को धन मुहैया कराता रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान के हमास नेताओं के साथ नजदीकी संबंध भी हैं। उन्होंने कई बार हमास नेताओं के साथ बैठकें भी की हैं, जिनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। तुर्की हमास नेताओं को पासपोर्ट भी जारी करता है,ताकि वह विदेश यात्रा कर सकें।
हाल के वर्षों में तुर्की हमास का एक प्रमुख प्रायोजक और उसके संचालन का एक प्रमुख केंद्र बन गया था। वहीं, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर सिनान सिद्दी ने कहा कि रॉकेट के निर्माण के लिए हमास द्वारा उपयोग किए जाने वाले 16 टन कच्चे माल की जब्ती, एक बार फिर आतंकवाद विरोधी तुर्की की निष्ठाहीन प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। एक ओर, तुर्की इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने की अपनी इच्छा की घोषणा करता है, वहीं, दूसरी ओर वह एक प्रमुख आतंकवादी समूह का समर्थन करना जारी रखता है, जो इजरायल के अस्तित्व को मिटाने की धमकी देते हैं। एर्दोगन सरकार पूरे क्षेत्र में हमास और अन्य जिहादी संस्थाओं के लिए समर्थन का प्राथमिक स्रोत बनी हुई है।
गौरतलब है कि गाजा में इजरायली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने 2008-2009 के ऑपरेशन कास्ट लीड के बाद एक समय सहयोगी रहे तुर्की और इजरायल के बीच रिश्ते ठंडे पड़ गए। अंकारा ने सितंबर 2011 में औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध तोड़ दिए, जब तुर्की के तत्कालीन प्रधानमंत्री, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन ने व्यक्तिगत रूप से गाजा की इजरायली नाकाबंदी को तोड़ने के लिए जहाजों के एक बेड़े को हरी झंडी दे दी, जिसके कारण मई 2010 में इजरायली बलों के साथ एक घातक घटना हुई। 2014 में हमास ने इस्तांबुल में अपना मुख्यालय स्थापित किया। इसके बाद से तुर्की हमास के लिए स्वर्ग बन गया है। हमास का शीर्ष नेता इस्माइल हनिया अक्सर तुर्की आता जाता रहता है। उनके और उनके बेटे के पास तुर्की का पासपोर्ट है। हमास के वेस्ट बैंक प्रमुख सालेह अल-अरौरी भी इस्तांबुल में रहता है। अल-अरौरी अमेरिका का प्रतिबंधित आतंकवादी है जिसके सिर पर 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का इनाम है।
फिलहाल, हमास के आपरेशन “अल-अक्सा-फ्लड को काउंटर करने के लिए इजरायली फोर्स ने आपरेशन “आयरन आफ स्वार्ड” लांच किया हुआ हैं, जिसके अनुसार इजरायली एअर फोर्स पिछले कई घंटों से गाजा पट्टी पर लगातार भीषण बमबारी कर रही है। जिससे गाजा शहर मलबे तबदील हो चुका है। इतना ही नहीं इजरायली फौज भी भारी संख्या में टैंकों के साथ गाजा की ओर मूव कर चुकी है, जिससे साफ है कि हवाई हमले के बाद जमीनी लड़ाई भी चलेगी। जो कि भारी तबाही मचायेगी।
