इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

कश्मीर और अफगानिस्तान में आतंकवाद का जनक पाकिस्तान का वह क्रूर तानाशाह जनरल जिया उल, जिसने कि कश्मीर में आॅपरेशन “टोपैक” लांच किया, और उसका अंत हुआ बहुत खौफनाक चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


फाईल फोटो

नई दिल्ली। पाकिस्तान के इतिहास में सियासत का टर्निंग प्वाइंट कहे जाने वाला दिन 17 अगस्त 1988 को उस दिन दोपहर इस्लामाबाद से 530 किलोमीटर दूर बहावलपुर में एक अमेरिकी टैंक का टेस्ट होने वाला था। इस अमेरीकी टैंक के टेस्ट को पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह जनरल ज़िया उल हक को देखने जाना था,लेकिन जिया उल वहां नहीं जाना चाहते थे,मगर पाकिस्तान फौज के कई जनरलों ने उन्हे इस टैंक के टेस्ट देखने के लिए बहावलपुर चलने के लिए उन्हें राजी कर लिया।

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फिर दोपहर करीब 12 बजे जनरल ज़िया उल बहावलपुर पहुंचे,जहां उन्होने अमेरिकी टैंक का टेस्ट देखा जो बहुत खराब साबित हुआ,उसके बाद जनरल ज़िया गुस्से में थे,और वो बहावलपुर एयरपोर्ट पहुंचे जहां उनका विमान वहां पहले से ही मौजूद था,बताया जाता है कि जिया का यह सी-130 मॉडल का विमान हर तरह की सुविधाओं से लैस था। जनरल ज़िया एअरपोर्ट पर जाने से पहले वहां लोगों से मिल रहे थे जहां उन्हे कुछ आम की पेटियां तोहफे में दी गईं,जो उनके विमान में रखवा दी गईं।

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बताते चले कि उस दिन जनरल जिया के साथ पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत ऑर्नाल्ड रॉफेल के अलावा पाक फौज के कई और भी आर्मी जनरल मौजूद थे,सिर्फ जनरल मिर्ज़ा असलम बेग हीं,उस विमान में सवार नही हुए जबकि जनरल बेग को भी ज़िया के विमान में सवार होना था लेकिन आखिरी वक्त में उन्होने मना कर दिया और पीछे खड़े एक दूसरे विमान में सवार हो गए।

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फिर जनरल ज़िया के प्लेन ने टेक ऑफ किया,कंट्रोल टॉवर ने जनरल जिया के विमान पायलट मशहूद हसन से लोकेशन पूछी,तो पायलट हसन ने कहा स्टैंडबाय,यानि सब ठीक चल रहा है लेकिन फिर तीन मिनट बाद ही सब कुछ तेजी से बदल गया,अचानक कंट्रोल टॉवर और जनरल जिया के विमान का संपर्क टूट गया और कंट्रोल टॉवर से विमान के पायलट को बार-बार मैसेज भेजा जाने लगा जा लेकिन पायलट हसन की तरफ से कंट्रोल टावर को कोई जवाब नहीं मिल रहा था।

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इसी दौरान बहावलपुर के रेगिस्तान में मौजूद कुछ लोगों ने देखा कि एक विमान हवा में हिचकोले खा रहा है, ये जनरल ज़िया का हीं विमान था,जो कि तेज़ी से नीचे गिर रहा था, और थोड़ी ही देर में यह विमान एक धमाके के साथ ज़मीन से टकराया और फिर यह विमान पूरी तरह से आग के गोले में तब्दील हो गया।

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कहा जाता है कि जनरल ज़िया का विमान जब जमीन से टकराकर विस्फोट के साथ धूं-धूं करके जल रहा था ठीक उसी वक्त आसमान में एक और विमान जमीन पर क्राश हुए जनरल जिया के विमान के उपर मंडराने लगा और इस विमान ने जिया के क्राश विमान के मलबे के उपर तीन चक्कर लगाए और चला गया। बताया जाता है कि ये दूसरा विमान जनरल मिर्ज़ा असलम बेग का था,जनरल मिर्ज़ा मौके पर उतरने के बजाए सीधे राजधानी इस्लामाबाद चले गए। ये जानते हुए भी कि जनरल ज़िया का विमान मलबे के ढेर में बदल चुका है,आग और धुएं का गुबार जब हटा तो यहां वहा बिखरी पड़ी थीं 30 लाशें,जिनमें से एक लाश पाकिस्तान के तानाशाह राष्ट्रपति जनरल ज़िया उल हक की थी।

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देर शाम तक सारा पाकिस्तान और पूरी दुनिया जान चुकी थी कि तानाशाह ज़िया अब नहीं,लेकिन सवाल अभी बाकी था कि आखिर कैसे पाकिस्तान का सबसे महफूज़ विमान इस तरह ज़मींदोज़ हो गया। ये एक ऐसा राज़ है जो आज भी हर पाकिस्तानी जानना चाहता है।

इस दुर्घटना के बाद कुछ लोगों ने इसे हादसा माना तो कुछ लोगों ने इसे बहुत बड़ी साजिश बताया,लेकिन इस दुर्घटना का खुलासा नहीं हो सका।
इस प्लेन क्रैश की उच्च स्तरीय जांच के लिए अमेरिका के एयरफोर्स ने एक विशेषज्ञों की टीम भेजा जिसने प्लेन क्रैश की मुख्य वजह विमान में तकनीकी खराबी बताया,दरअसल इस दुर्घटना में अमेरिकी राजदूत भी मारे गए थे इसीलिए अमेरिका को जांच में हस्तक्षेप करना पड़ा।

वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इस घटना में अमेरिकी खुफिया ऐजेंसी,रूस की ऐजेंसी और भारत की खुफिया ऐजेंसी राॅ पर भी शक किया गया,लेकिन पाकिस्तानी खुफिया ऐजेंसी के तत्कालीन चीफ ने सिर्फ रूसी ऐजेंसी पर शक की संभावना जाहिर किया उधर भारतीय खुफिया ऐजेंसी राॅ के तत्कालीन चीफ आनंद वर्मा ने यह साफ किया कि इस घटना में अमेरिकी ऐजेंसी और रूसी ऐजेंसी के शामिल होने की कोई गुंजाइश ही नहीं है और रही बात भारतीय ऐजेंसी का तो राॅ का इस घटना से दूर दूर तक इसलिए संबंध नहीं है क्योंकि उस समय भारत-पाकिस्तान का सियाचिन मुद्दा जनरल जिया उल ने करीब-करीब बातचीत से सुलझा लिया था जो कि दोनों पक्षों के हितों में था सिर्फ जिया के अन्य अधीनस्थों की सहमति बाकी थी,लेकिन इसी दौरान यह दुर्घटना घटित हो गई जिस वजह से भारत नुकसान की स्थिति में था,मतलब राॅ चीफ का साफ इशारा पाकिस्तान की तरफ था उनका कहना था कि सियाचिन मुद्दे पर पाकिस्तान के कुछ लोग इस
समझौते से सहमत नहीं थे इसीलिए हो सकता हो कि साजिश का ताना-बाना इसी मुद्दे को लेकर बुना गया हो और घटना को अंजाम दे दिया गया।

उल्लेखनीय है कि चापलूसी के बदौलत जिया उल हक पाकिस्तान के आर्मी चीफ हुए थे,और ये भारत के खिलाफ 1948,1965 और 1971 की जंग में लड़े थे,जुल्फ कार अली भुटटो ने ही जिया उल हक को पाकिस्तान आर्मी का चीफ बनाया था जहां बाद में जनरल जिया उल ने पाकिस्तान में तख्तापलट करते हुए अली भुटटो को जेल में बंद कर दिया और कुछ दिन बाद अली भुटटो को फांसी दिलवाकर मौत की सजा दे दिया था। और खुद पाकिस्तान के तानाशाह बन बैठे।

फिर जिया ने भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रचते हुए कश्मीर में आतंकवाद को पैदा किया और इस लड़ाई को आॅपरेशन “टोपैक” नाम दिया और इसी कड़ी में जिया ने अफगानिस्तान में रूसी दबदबे को खत्म करने के लिए अमेरिका से अरबों डालर में एक डील किया और सारा पैसा खुद हड़प लिये और अफगानिस्तान में तालिबान को जन्म दिया,
जनरल जिया उल की ही देन हैं कि भारत के कश्मीर में आतंकवाद और अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव बढ़ाया जिसका कि भुक्तभोगी दोनों देशों की जनता आज भी है।

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