इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

फ्रांस की एक ऑनलाइन मीडिया समूह ने किया बड़ा खुलासा, राफेल सौदे में 65 करोड़ रुपये की हुई थी रिश्वतखोरी, बिचौलिया को यह भुगतान किया गया था फर्जी कंपनी के नाम पर, CBI और ED को भी थी इस कांड की जानकारी, लेकिन ऐजेंसियां रहीं मौन – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


राफेल फाइटेर एअरक्राफ्ट (फाइल फोटो)

पेरिस। भारत के साथ राफेल सौदे को लेकर फ्रांस की एक ऑनलाइन पत्रिका के हवाले से एक बड़ा दावा किया जा रहा है जिसमें बताया जा रहा है कि राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने डील कराने के लिए भारतीय बिचौलिए सुशेन गुप्ता को करीब 65 करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी और इस रिश्वतखोरी की पूरी जानकारी देश की सबसे बड़ी जांच ऐजेंसी सीबीआई और ईडी को भी थी, लेकिन इन ऐजेंसियों ने इस प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं की। बताते चले कि भारत ने फ्रांस से 59000 करोड़ रुपए में 36 राफेल फाइटेर एअरक्राफ्ट का डील किया था।

राफेल फाइटेर एअरक्राफ्ट (फाइल फोटो)

इस कथित खुलासे के अनुसार फ्रांसीसी विमान निर्माता दसॉल्ट एविएशन को भारत के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा सेक्योर करने में मदद करने के लिए बिचौलिया गुप्ता को कमीशन कम से कम 7.5 मिलियन यूरो यानी करीब 65 करोड़ रुपए का भुगतान इन चालानों के जरिए किया गया था जो कि जीता जागता साक्ष्य है फिर भी भारतीय ऐजेंसियां आंखें मूंदें रही।

उल्लेखनीय है कि राफेल सौदे में भ्रष्टाचार और पक्षपात की जांच के लिए एक फ्रांसीसी न्यायाधीश को नियुक्त किया गया था,और इस कांड के बारे में अप्रैल 2021 में इसी आनलाइन मीडिया ने रिपोर्ट करते हुए तब भी दावा किया था जिसमें दर्शाया गया था कि दसॉल्ट और उसके औद्योगिक साझेदार थेल्स (एक रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स फर्म) ने बिचौलिए गुप्ता को राफेल डील के संबंध में ‘सीक्रेट कमीशन’ में कई मिलियन यूरो का भुगतान किया था।

अप्रैल की रिपोर्ट की मानें तो अधिकांश भुगतान 2013 से पहले किए गए थे। सुशेन गुप्ता से जुड़े एक अकाउंट स्प्रेडशीट के अनुसार, ‘डी नाम की एक कंपनी (जो कि एक कोड है, जिसे वह नियमित रूप से दसॉल्ट के लिए उपयोग करता है) ने 2004-2013 की अवधि में सिंगापुर में शेल कंपनी इंटरदेव को 14.6 मिलियन यूरो (125.26 करोड़ रुपये) का भुगतान किया। रिपोर्ट में कहा गया कि इंटरदेव एक शेल कंपनी थी, जो रियल एक्टिविटी में शामिल नहीं थी और इसे गुप्ता परिवार के लिए एक स्ट्रॉमैन (फेक कैंडिडेट) द्वारा चलाया जाता था। बता दें कि शेल कंपनियां वे कम्पनियां होती हैं, जो प्रायः कागजों पर चलती हैं और पैसे का भौतिक लेनदेन नहीं करतीं।

राफेल फाइटेर एअरक्राफ्ट (फाईल फोटो)

रिपोर्ट में कहा गया है कि गुप्ता से संबंधित एक अन्य अकाउंट स्प्रैडशीट के अनुसार, जिसमें केवल 2004 से 2008 के दौरान का लेखा-जोखा है, थेल्स ने दूसरी शेल कंपनी को करीब 20 करोड़ का भुगतान किया। अप्रैल में ही फ्रांसीसी मीडिया ने देश की भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी की जांच का हवाला देते हुए खबर प्रकाशित की थी कि राफेल के 50 रिप्लिका मॉडल तैयार करने के लिए ‘दसॉल्ट एविएशन ने भारतीय बिचौलिए गुप्ता को 1 मिलियन यूरो की रिश्वत दी थी।

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