
बोरिस जाॅनसन और जेलेंसकी कीव में किसी गोपनीय स्थान पर मीटिंग के दौरान साभार- (सोशल मीडिया)
कीव/लंदन/मॉस्को। रूस-यूक्रेन के बीच जारी भीषण लड़ाई के दौरान भीषण गोलाबारी व बमबारी के बीच एक दिन पहले शनिवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन यूक्रेन की यात्रा पर पहुंचे,जहां इस दौरान बोरिस जॉनसन ने यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ मीटिंग की और उन्होंने कहा कि रूस के लगातार हमलों के बीच ब्रिटेन अपने सहयोगी यूक्रेन की मदद करना चाहता है,जिससे वह अपनी रक्षा कर सके।
वहीं,बोरिस जाॅनसन के इस यात्रा व मुलाकात पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अपना बयान जारी करते हुए साफ किया कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में ब्रिटेन की ओर से यूक्रेन को दिए जाने वाले दीर्घकालिक समर्थन और वित्तीय-सैन्य सहायता के नए पैकेज पर चर्चा होगी। बता दें कि इस यात्रा पर रवाना होने से पहले बोरिस जॉनसन ने यूक्रेन को उच्च क्षमता वाले सैन्य उपकरण खरीदने के लिए और 10 करोड़ पाउंड देने का ऐलान किया था।
बताते चले कि बोरिस जॉनसन ने शनिवार की यूक्रेन यात्रा के पहले शुक्रवार रात जर्मनी के चांसलर ओलाफ शाल्त्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की थी,जहां इस बैठक के बाद एक हुई प्रेसवार्ता आयोजित की गई,जिसमें जॉनसन ने कहा था कि वह यूक्रेनी सेना को विमान रोधी मिसाइल और अन्य 800 टैंक रोधी मिसाइल देंगे।
इस दौरान उन्होंने यूक्रेन को और अधिक हेलमेट,नाईट विजन रात को उपकरण व अन्य हथियार देने का भी वादा किया था। गौरतलब है कि ब्रिटेन से गैर घातक 2 लाख सैन्य उपकरणों की खेप पहले ही यूक्रेन पहुंच चुकी है। हालांकि उसने और बाकी नाटो देशों ने रूस से लड़ने के लिए अपने सैनिकों को यूक्रेन की धरती पर उतारने से इस बार भी इनकार किया है।
मालूम हो कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी भीषण लड़ाई 45 दिनों से अधिक हो चला है,जहां इस दौरान यूक्रेन में भारी तबाही का आलम है,वहीं भारी संख्या में यूक्रेन के सैनिकों के साथ-साथ भारी संख्या में यूक्रेन के आम नागरिक भी हताहत हुए हैं जिनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल है,इसी बीच यूक्रेन के करीब 44 लाख आम नागरिक यूक्रेन छोड़कर पड़ोसी देशों में शरण ले रखें है,हालांकि देश में मार्शल लाॅ लागू होने की वजह से न्यूनतम 18 व अधिकतम 50 वर्ष के उम्र वाले आम यूक्रेनी टेरीटोरियल आर्मी की सेवा में देश की रक्षा के लिए दुश्मन से जंग लड़ रहे हैं,शायद यही बड़ी वजह रही जिससे कि दुश्मन भी भारी नुकसान का सामना कर रहा है और अभी तक कोई खास सफलता भी नहीं पा सका है।
