एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

कर्नाटक हिजाब विवाद में खूंखार आतंकी “अल जवाहिरी” ने भारत के खिलाफ उगला जहर, विडियो सामने आने के बाद अमेरिकी ऐजेंसियों के साथ भारत की भी इंटेलीजेंस ऐजेंसियां हुई सतर्क – चंद्रकांत मिश्र/हेमंत सिंह


खूंखार आतंकी संगठन “अल कायदा” का चीफ जवाहिरी (फाईल फोटो)

काबुल/नई दिल्ली। भारत के कर्नाटक हिजाब विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है,अब इस विवाद में खूंखार आतंकी संगठन अल कायदा की भी अचानक रूचि बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि अल कायदा का सरगना अल-जवाहिरी ने वीडियो जारी कर कहा कि हिजाब विवाद पर दुनियाभर के मुसलमान उन लड़कियों का खुलकर सपोर्ट करें,जो इसको पहनने के लिए लड़ रही हैं। बता दें कि अल-जवाहिरी का विडियो सामने आने पर भारत की सुरक्षा एवं इंटेलीजेंस ऐजेंसियां हरकत में आ गई है।

बताया जा रहा है कि एक न्यूज डेली वेबसाइट पर मौजूद 9 मिनट के इस वीडियो में खूंखार आतंकी जवाहिरी ने कहा कि भारत के हिंदू लोकतंत्र में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है। उसने कर्नाटक हिजाब विवाद के दौरान सुर्खियों में आई मुस्कान को महान गर्ल बताया।

इस दौरान उसने आगे भी कहा कि फ्रांस,मिस्र और हॉलैंड इस्लाम विरोधी देश हैं। यहीं नहीं उसने पाकिस्तान और बांग्लादेश को भी जमकर लताड़ा। मालूम हो कि वर्ष 2021 के बाद जवाहिरी का यह पहला वीडियो दुनिया के सामने आया है। वहीं,वीडियो आने के बाद अमेरिकी इंटेलिजेंस ऐजेंसियों के साथ-साथ भारतीय ऐजेंसियां भी हरकत में आ गई है। दरअसल,जवाहिरी अमेरिका के 9/11 हमले का मुख्य आरोपी है। जिसकी तलाश अमेरिकी ऐजेंसियों को अभी तक है।

गौरतलब है कि जवाहिरी ने अमेरिकी हमले में ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद संगठन की कमान अपने हाथ में ली थी। इजिप्ट का रहने वाला जवाहिरी आंखों का डॉक्टर था। 2011 में वह अल कायदा का मुखिया बना। दुनिया भर में कई जगह हुए आतंकी हमलों के पीछे उसका हाथ माना जाता है। 15 साल की उम्र में जवाहिरी को पहली बार गिरफ्तार किया गया था। 1974 में उसने केयरो यूनिवर्सिटी के मेडिकल स्कूल से ग्रेजुएशन किया था। यहां उसके पिता प्रोफेसर थे।

उधर,कर्नाटक हाईकोर्ट से मामला खारिज होने के बाद हिजाब का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला 24 मार्च को लगी थी, जिस पर सुनते हुए CJI ने कहा था कि इसे सनसनीखेज मत बनाओ। हम इसकी अर्जेंट सुनवाई नहीं करेंगे।

दरअसल,कर्नाटक हाईकोर्ट के तीन मेंबर वाली बेंच ने मामले में 15 मार्च को फैसला सुनाते हुए दो अहम बातें कहीं थी जिसमें पहली- हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। दूसरी- स्टूडेंट्स स्कूल या कॉलेज की तयशुदा यूनिफॉर्म पहनने से इनकार नहीं कर सकते।

चूंकि कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद 1 जनवरी को शुरू हुआ था। यहां उडुपी में 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कॉलेज में क्लास रूम में बैठने से रोक दिया गया था। कॉलेज मैनेजमेंट ने नई यूनिफॉर्म पॉलिसी को इसकी वजह बताया था। इसके बाद इन लड़कियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। लड़कियों का तर्क है कि हिजाब पहनने की इजाजत न देना संविधान के आर्टिकल 14 और 25 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हनन है।

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