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छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहा बांग्लादेशी दंपति गिरफ्तार

दुर्ग/रायपुर, (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार की जा रही है। इसके लिए एसटीएफ लगातार कार्रवाई में जुटी है। एसटीएफ ने दुर्ग जिले से अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी दंपति को गिरफ्तार किया है।

एसटीएफ काे 16 मई को सूचना मिली थी कि दुर्ग जिले के सुपेला भिलाई थानांतर्गत पांच रास्ता, सुपेला में कांट्रेक्टर कॉलोनी के एक मकान में बांग्लादेशी दंपति रह रहा है। इसके बाद पुलिस ने वहां दबिश दी तो ज्योति और रासेल शेख मिल गए। दोनों अपनी असली पहचान बदलकर यहां रह रहे थे। एसटीएफ ने सख्ती से पूछताछ की तो महिला ने अपना असली नाम शाहीदा खातून और उसके पति ने अपना नाम मोहम्मद रासेल शेख निवासी ग्राम बाला, पोस्ट रघुनाथ नगर थाना झीकार गाछा, जिला जेस्सोर, बांग्लादेश बताया।

जांच में पता चला है कि 2009 में महिला शाहीदा खातून अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत आ गई थी। नार्थ-24 परगना, पश्चिम बंगाल से हावड़ा होते हुए मुंबई जाकर मजदूरी करने लगी। वहां उसकी पहचान रासेल शेख से हुई। इसके बाद दोनों वापस बांग्लादेश गए और महिला ने अपना नाम बदलकर ज्योति रख लिया और रासेल से शादी कर ली।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने शनिवार काे इसका खुलासा करते हुए बताया कि दोनों पति पत्नी 2009 में बांग्लादेश से भारत आए थे और हावड़ा होते हुए मुंबई के ठाणे में पहुंचे थे। बांग्लादेश के रहने वाली शाहीदा खातून और उसके पति मोहम्मद रसेल ने पहले ठाणे में फर्जी दस्तावेज बनवाया, फिर 2017 में भिलाई आ गए और यहां मजदूरी और कैटरिंग का काम करने लगे। दोनों बांग्लादेश के रघुनाथपुर के जिला जस्सोर के रहने वाले थे और 2009 में भारत-बांग्लादेश के बोंगा बॉर्डर से भारत पहुंचे थे।

एसएसपी अग्रवाल ने बताया कि 2017 में ही दोनों बांग्लादेश गए थे और वहां शादी करने के बाद वीजा लेकर भारत आए थे, लेकिन इन दोनों का वीजा खत्म हो गया था। इसी बीच 2020 में उन्हें सुपेला पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब भी उनके पास कोई दस्तावेज नहीं होने के कारण उन पर विदेशी विषयक अधिनियम भारतीय पासपोर्ट अधिनयिम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इधर इन कुछ सालों में इन दोनों ने सुपेला में रहते हुए फिर से कुटरचित कर भिलाई का आधारकार्ड बनाया।

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि दोनों के पास पासपोर्ट भी था, लेकिन पासपोर्ट की वैधता खत्म होने के बाद भी ये लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। शाहिदा खातून का वीजा 13 सितंबर 2018 और रासेल का वीजा 12 अप्रैल 2020 को समाप्त हो गया था। फिलहाल दुर्ग पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर आज न्यायालय में पेश किया है।

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