स्पेशल रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में नक्सल मूवमैंट खत्म करने का पुलिस फोर्स ने बदला अपना पैटर्न, पुलिस द्वारा नक्सलियों के प्रति अच्छी छवि पेश करने की वजह से तेजी से आत्मसमर्पण करने वालो की बढ़ रही है संख्या – हेमंत सिंह (स्पेशल एडिटर)

जगदलपुर । रिपोर्ट है कि छत्तीसगढ़ में केंद्र व राज्य की फोर्स के बढ़ते दबाव में नक्सलवाद का प्रभाव छत्तीसगढ़ के बस्तर में धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। लेकिन किस इलाके में अब भी नकसल मूवमैंट से कितना खतरा है ? यह जानने के लिए राज्य की पुलिस फोर्स ने कई कोड बनाया हुआ हैं। जिसमें पुलिस फोर्स प्रमुख रुप से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के बैंक खातों के बारें में जानकारी लेते हुए इस कार्यवाही को आगे बढ़ा रही है ताकि फोर्स को यह मालूम हो सके कि किस इलाके में नक्सली अभी भी कितने मजबूत हैं। इनके अलावा उस इलाके के लोगों की सक्रियता,सरकारी योजनाओं में भागीदारी और वहां होने वाले उत्सव व समारोह आदि ऐसे कोड है।

सूत्रों ने जानकारी दिया है कि राज्य के दंतेवाड़ा जिले में पुलिस फोर्स घर वापसी की अभियान चला रही है। इसके तहत हर दो-चार दिन में नक्सली आत्मसमर्पण करने को आ रहे हैं। इससे साफ है कि अब उनके कैडर के लोग भी हिंसा से ऊब चुके हैं। इस अभियान में पुलिस नक्सलियों व उनके
स्वजनों की भी भरपूर मदद कर रही है। उनके गांवों में जाकर स्वजनों को राशन,दवाएं व अन्य जरूरत की वस्तुएं देकर अपने अनुकूल माहौल बना रही है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का बैंक खाता,पैन कार्ड,आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र आदि भी बनवा रही है। उनके लिए जारी प्रोत्साहन राशि को खाते में भी डाला जा रहा है। अगर खाते से रकम निकलती रहती है,तो पुलिस मान लेती है कि उस इलाके में नक्सलियों का खतरा कम हो रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने इस साल 15 अगस्त को पहली बार 15 गांवों को नक्सलमुक्त घोषित किया है।

एक अन्य जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा हैं कि इलाके में वाहनों की बिक्री का बढ़ जाना,आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का बाजार आना-जाना,लोन,पेंशन आदि के लिए बैंक जाना, आधार व पैन कार्ड बनवाने के लिए घर से निकलना आदि इस बात का संकेत होता है कि वहां नक्सलवाद धीरे धीरे अपने क्षीण अवस्था को प्राप्त हो रहा है।

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