
सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली/वाशिंगटन। पिछले कुछ सालों से चीन के हैकर भारत में सायबर हमला करने की फिराक में रहते हैं,जहां इस दौरान कई बार हमला भी किया जा चुका है,हालांकि भारतीय ऐजेंसियों की सतर्कता के चलते दुश्मन के हमलों को नाकाम कर दिया जाता रहा है,लेकिन समय-समय पर दुश्मन अपनी सक्रियता का अनुभव कराता रहता है। इसी कड़ी में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा जा रहा है कि चीनी हैकरों ने हाल के महीनों में साइबर-जासूसी अभियान में भारत के बिजली क्षेत्र को टारगेट किया है। बता दें कि यह रिपोर्ट ब्लूमबर्ग ने थ्रेट इंटेलिजेंस फर्म रिकार्डेड फ्यूचर के हवाले से सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हैकर्स ने उत्तर भारत के कम से कम ‘सात डिस्पैच’ सेंटर पर फोकस रखा था। ये सेंटर्स पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन बॉर्डर के पास के क्षेत्र ने ग्रिड कंट्रोल और बिजली पहुंचाने के लिए रियल-टाइम ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लोड डिस्पैच सेंटर्स में से एक पर इससे पहले रेडइको नाम के हैकिंग ग्रुप ने भी अटैक किया था। रिकॉर्डर फ्यूचर की रिपोर्ट बताती है कि यह ग्रुप एक बड़े हैकिंग ग्रुप से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस ग्रुप को चीन सरकार से जोड़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी सरकार से जुड़े ये हैकिंग ग्रुप पावर ग्रिड को टारगेट कर आर्थिक और पारंपरिक खुफिया जानकारी जुटाते हैं जिसका भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकता है।
वहीं चीनी हैकर्स ने भारत की नेशनल इमरजेंसी रेस्पोंस सिस्टम और एक मल्टीनेशनल लॉजिस्टिक कंपनी की सहायक कंपनी को भी निशाना बनाया है। TAG-38 नाम के इस हैकिंग ग्रुप ने शैडोपैड नाम के एक खतरनाक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है। इस सॉफ्टवेयर के लिंक चीनी सेना और चीनी रक्षा मंत्रालय से जुड़े रहे हैं।
रिपोर्ट की माने तो इन चीनी हैकर्स द्वारा इस्तेमाल किए गए तकनीक और तरीके काफी असामान्य थे। कहा जा रहा है कि इस हैकिंग ग्रुप ने दक्षिण कोरिया और ताइवान स्थित इक्विपमेंट्स के जरिए पावर ग्रिड को टारगेट किया है। फिलहाल,चीनी विदेश मंत्रालय ने इस प्रकरण में अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। लेकिन चीन लगातार हैकिंग से जुड़े घटनाओं में शामिल होने से इनकार करता रहा है। बताते चले कि अभी हाल ही में खुलासा हुआ था कि चीन इन हैकरों द्वारा अपने दुश्मन देशों के उपर लगातार निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर सायबर हमले से भी नहीं चूकता,फिलहाल भारतीय ऐजेंसियां चीन के इस हरकत पर पूरी नजर बनायी हुई है वहीं अमेरिकी ऐजेंसियां भी सक्रिय है चूंकि हाल ही में अमेरिका चीनी हमलों का शिकार बन चुका है।
