इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

मणिपुर में सेना के काफिले पर हुए आतंकी हमले में, चीन की भूमिका संदिग्ध, पहले भी चीन पर उठते रहे हैं सवाल – हेमंत सिंह (स्पेशल एडिटर)


शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी (फाईल फोटो)

कलकत्ता। मणिपुर में बीते शनिवार को सेना के एक काफिले पर म्यांमार बॉर्डर के पास हुए आतंकी हमले में सेना के एक अधिकारी व उनकी पत्नी तथा बच्चे सहित 5 अन्य सैनिक शहीद हो गए थे,इस घातक हमले के बाद पूर्वोत्तर में विद्रोही गुटों को चीन की ओर से संभावित समर्थन की रिपोर्ट सामने आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संभावना से कतई नहीं इंकार किया जा सकता है कि इस साजिश में चीन का हाथ न हो।

बताया जा रहा है कि मणिपुर सहित पूर्वोत्तर में विद्रोही गुटों जैसे अराकन आर्मी और म्यांमार में यूनाइटे वी स्टेट आर्मी का सस्त्र गुटों से लिंक है, जिनके पास चीनी हथियार मौजूद हैं। इसी कड़ी में एक अन्य सूत्र ने बताया कि चीन ने यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम के चीफ परेश बरूआ और नेशनल सोशलिस्ट ऑफ नागालैंड के फुंटिंग शिमरंग को सुरक्षित पनाहगाह दी है।

उल्लेखनीय है कि शनिवार को मणिपुर के छुरछंदपुर जिले में उग्रवादियों ने भारतीय सेना के रेजिमेंट के असम राइफल्स के काफिले पर हमला कर दिया,इस दौरान 46 असम राइफल्स के CO कर्नल विपल्व त्रिपाठी और उनकी क्विक रिएक्शन टीम बेहियांग सीमा चौकी से लौट रहे थे और खुगा में बटालियन मुख्यालय की ओर जा रहे थे। रेवोलूशनरी पीपल्स फ्रंट जिसके तहत लिब्रेशन आर्मी मणिपुर अपने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है। इस संगठन ने मणिपुर नागा पीपल्स फ्रंट के साथ हमले की जिम्मेदारी ली है, लेकिन कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि काफिले में परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।

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