भारत में एक भी मुस्लिम के साथ मामूली घटना होने पर भी तुरंत हि उस घटना का अंतर्राष्ट्रीय करण हो जाता है जबकि चीन में वर्षो से लगातार उइगर मुस्लिमों के साथ बड़ी हि बेरहमी के साथ उनपर अत्याचार व उनका शोषण किया जाता रहा है फिर भी इस समुदाय से संबंधित अन्य देश एक शब्द तक नहीं बोलते हैं जबकि इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई मानवाधिकार संगठनों तथा समाचार संस्थानों द्वारा समय-समय पर चीन की इस हरकत को पूरे सबूत के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक किया जाता रहा है लेकिन एक भी देश इस गंभीर विषय पर अपनी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं अभी हाल ही में बीबीसी न्यूज़ एजेंसी ने चीन से भागी एक उईगर मुस्लिम महिला के हवाले से तथा अन्य स्रोतों से प्राप्त रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है कि किस प्रकार से चीन में उईगर मुस्लिम महिलाओं /बच्चो आदि का शोषण किया जाता है, जिस पर बीबीसी से चीन चिढ़ गया है , क्या है पूरी सच्चाई आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में
चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म और अल्पसंख्यक लोगों के साथ यातनाओं की कई घटनाएं सामने आई हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए री-एजुकेशन शिविरों में महिलाओं के साथ योजनाबद्ध तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है।
इन शिविरों में उइगर मुस्लिमों को कैद करके रखा गया है और यहां उन्हें कई तरह की यातनाएं दी जाती हैं। हालांकि चीन इन रिपोर्ट्स को खारिज करता रहता है। हाल ही में बीबीसी ने इन बंदी कैंपों से भागी महिलाओं, गार्डों और विभिन्न जांचों के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है।
इस रिपोर्ट में एक उइगर मुस्लिम महिला ने अपनी आपबीती बताई है। महिला का दावा है कि चीन के री-एजुकेशन शिविर में आज भी योजनाबद्ध तरीके से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न होता है और उन्हें खौफनाक यातनाएं दी जाती हैं। इस रिपोर्ट के बाद कई प्रमुख अमेरिकी सांसद, नेता और मानवाधिकार संगठनों ने अपना विरोध जताया है।
इन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में एक जांच की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक जेल से भागने के बाद तुरुसुने जियावुदुन भागकर अमेरिका पहुंच गईं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को ‘हर रात’ सेल से उठा लिया जाता था। इसके बाद उनके साथ मास्क पहने लोग दुष्कर्म करते हैं। उन्होंने अपनी कहानी आगे बताते हुए जानकारी दी कि मेरे साथ तीन बार ऐसा हो चुका है। रिपोर्ट में वहां तैनात गार्डों के हवाले से भी यह बात कही गई है।
यातना शिविरों में दस लाख से ज्यादा उइगर
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इन शिविरों में दस लाख से ज्यादा महिला और पुरुषों को रखा गया है। इस पर चीन का कहना है कि इन शिविरों को मुस्लिम और अन्य समुदाय के लोगों को दोबारा शिक्षित करने के लिए बनाया गया था। मानवाधिकार संगठनों ने चीन के इन शिविरों के खिलाफ आरोप लगाया है कि यहां उइगर समुदाय के लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
महिलाओं के साथ व्यवस्था बनाकर किया जाता है दुष्कर्म
अमेरिका पहुंचीं तुरुसुने जियावुदुन ने बताया कि हर रात किसी ना किसी महिला को सेल से उठाकर ले जाया जाता है। मास्क पहने चीनी नागरिक बारी-बारी से महिलाओं के साथ दुष्कर्म करते हैं। तुरुसुने जियावुदुन ने बताया कि उनके साथ ऐसा तीन बार हो चुका है और दो से तीन लोगों ने ऐसा किया है।
