
अमेरिकी सैनिक एक ड्रिल के दौरान,फाईल फोटो,साभार -(ट्वीटर से)
वाशिंग्टन। रूस-यूक्रेन जंग की आंच अब पूरी तरह से अमेरिका तक पहुंच चुकी है। स्तिथि इतनी गंभीर हो चली है कि पेंटागन इस समय जबरदस्त दबाव का सामना कर रहा है लेकिन उस दबाव को सार्वजनिक नहीं कर पा रहा है। यहां तक कि इस दबाव से जुड़ी रिपोर्ट को भी पब्लिक होने से रोकने के लिए वाशिंग्टन लगातार तमाम हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है, इसके बावजूद भी यह घटनाक्रम करीब-करीब बाहर हीं आ चुका है,आवश्यकता है बस अमेरिका के स्वीकारोक्ति की। फिलहाल, वाशिंग्टन अभी भी इस रिपोर्ट पर कुछ भी खुलकर बताने से कतरा रहा है। दरअसल, हाल ही में अमेरिका के ओहायो में घातक केमिकल से लदे एक ट्रेन के पचासों डिब्बे पटरी से उतर जाने के कारण इलाकें में कई घंटे आग की भीषण लपटें रहीं। जिसे कवरेज करने गए पत्रकारों को लोकल पुलिस ने रोका और उन्हें जबरन गिरफ्तार भी किया। जिस वजह से इस घटनाक्रम में तमाम ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है, जो कि किसी बड़ी अनहोनी की ओर साफ ईशारा कर रहे हैं।
दरअसल,इस साल के 30 जनवरी से हीं अमेरिका के अलग अलग हिस्सों में चीन के जासूसी गुब्बारों की मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आई, जिसे लेकर पेंटागन भारी दबाव में था, यहां तक की पूरी दुनिया भर के मीडिया समूहों की इस गुब्बारे से जुड़े सभी रिपोर्ट्स पर पूरी नजर बनी हुई थी। जहां इसी बीच 3 फरवरी को अमेरिका के ओहायो में 150 डिब्बों वाली एक ट्रेन के पचासों डिब्बे पटरी से उतर कर पलट गए, जहां इस दौरान वहां भारी आग की लपटें दिखाई देने लगी। इस बीच इस घटनाक्रम को कवरेज करने गए लोकल मीडियाकर्मियों को रोका नहीं किया गया बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी किया गया, जिससे घटना से जुड़ी तमाम आशंकाऐं जन्म लगी।
घटना वाले इलाकें को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी समय चीन के जासूसी गुब्बारों को लेकर देश-विदेश के सभी मीडिया रिपोर्ट्स में खूब हो हल्ला मचा था। यानि दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस ट्रेन वाली घटना को दबाने के लिए गुब्बारे वाली रिपोर्ट्स को ज्यादा तूल दिया गया। वहीं, इस ट्रेन दुर्घटना के बाद संबंधित इलाकें में लोगों ने कई तरह के इंफेक्शन की शिकायत की है,मसलन आंखों में जलन,जी मिचलाना,सांस लेने में दिक्कत होना आदि। इतना ही नहीं वहां के तालाबों की मछलियां भी भारी संख्या में मर गई है, पक्षियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की रिपोर्ट सामने आ रही है।
वहीं,इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी अमेरिका की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। इस बीच कुछ अमेरिकी मीडिया समूहों ने रिपोर्ट किया है कि इस ट्रेन दुर्घटना के बाद पेंटागन हरकत में है और दुनिया भर में मौजूद रूसी जासूसों के खिलाफ जबरदस्त वाॅर आॅपरेशन की तरह अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान जर्मनी, पोलैंड, स्वीडेन और नार्वे से कई रूसी जासूसों को गिरफ्तार किया गया है। यानि जिस तरह से इस घटनाक्रम पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है और रूसी जासूसों के खिलाफ दुनिया भर में सीक्रेट आॅपरेशन के तहत उन्हें टारगेट किया जा रहा है। ऐसे में हालात किसी गंभीर घटना से जुड़े संकेत दे रहे हैं। फिलहाल, अमेरिकी मीडिया समूहों ने दबी आवाज में इस घटना को सेकेंड यूक्रेन का चरनेबिल परमाणु हादसा या रूस द्वारा किसी सीक्रेट मिशन के तहत न्यूक्लियर अटैक करार दिया जा रहा है।
इस बीच इस घटनाक्रम का “सीक्रेट आॅपरेशन” मीडिया समूह ने संज्ञान लेते हुए घटना से जुड़े सभी तथ्यों एवं मीडिया रिपोर्ट्स का विश्लेषण करने के उपरांत इस नतीजे पर पहुंचा कि इस घटना को बहुत ही वेल प्लान के जरिए अंजाम दिया गया है जो कि इसे कोई वेल प्रोफेशनल इंटेलीजेंस ऐजेंसी हीं कर सकती है। ऐसे में रूस और चीन के अलावा दुनियां में अमेरिका का कोई इतना बड़ा दुश्मन नहीं है जो इस तरह के हरकत को अंजाम देने में सक्षम हो। अमेरिका के इन दोनों दुश्मन देशों के इतिहास पर गौर किया जाये तो तस्वीर साफ हो जाती है कि केवल रूसी खुफिया एजेंसियां हीं अमेरिका हीं नहीं दुनिया भर के तमाम रूस के दुश्मन देशों में भी इस तरह के घटना को अंजाम देने से बिल्कुल भी नहीं चूकती। रही बात चीन की तो वह अभी तक अमेरिका में सिर्फ सायबर अटैक और जासूसी तक ही सीमित रहा है। रूसी ऐजेंसियों पर शक करने के कई कारण है जिसमें प्रमुख रूप से रूस-यूक्रेन जंग है। अब यहां बताने की जरूरत नहीं है कि इस जंग के चलते रूसी ऐजेंसियों के टारगेट पर अमेरिका क्यों है ? ऐसे में “सीक्रेट ऑपरेशन” न्यूज पोर्टल समूह पूरे दावें के साथ इस घटना के लिए रूसी ऐजेंसियों को हीं जिम्मेदार मानता है। फिलहाल, घटना को कब कैसे और किन माध्यमों के जरिए अंजाम दिया गया है ? यह अभी तक साफ नही हो सका है।
गौरतलब है कि बीते 3 फरवरी को रात में अमेरिका के ओहायो में 150 डिब्बों वाली एक ट्रेन के पचासों डिब्बे अचानक पटरी से उतर गए, जहां इस दौरान घातक केमिकल से भरे ट्रेन के इन डिब्बों में भीषण आग लग गई। जहां पुलिस ने तत्काल इलाकें को पूरी तरह से सील करते हुए मीडिया कवरेज पर भी रोक लगा दी। यहां तक कि कई पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया। वहीं 5 हजार वाले नागरिकों के इस इलाकें में लोगों को तमाम स्वास्थ्य जनक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इसका घातक असर पशु-पक्षियों में भी देखने को मिल रहा है। इस बीच दुनिया भर में मौजूद तमाम रूसी जासूसों के खिलाफ अमेरिकी ऐजेंसियों ने युध्द स्तर पर आॅपरेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी तक अमेरिका ने इस घटनाक्रम से जुड़े मामले पर कुछ भी नहीं कहा है। लेकिन तमाम अमेरिकी मीडिया समूहों ने दबी आवाज में इसे सेकेंड चरनेबिल परमाणु हादसा या रूसी ऐजेंसियों द्वारा न्यूक्लियर अटैक कह रहे है। बता दे कि 26 अप्रैल 1986 में सोवियत संघ के विघटन के पहले यूक्रेन में स्थित चरनेबिल परमाणु संयंत्र में हादसा हो गया था, जहां उस समय पचासों लाख लोग हताहत हुए थे। उस समय इस हादसे को छिपाने के लिए सोवियत संघ ने सभी जरूरी उपायों पर अमल किया था। वह हादसा इतना गंभीर था कि घटना के इतने साल बाद भी उस इलाके में आज भी लोग बसने से कतराते है।
