
मुफ्ती मोहम्मद साथ में रूबिया (फाईल फोटो)
नई दिल्ली। वर्ष 1989 की एक ऐसी घटना जो उस समय पूरे देश को चौंका दी थी,उस घटना में बतौर गवाह पीड़िता को तलब किया गया है। जिस पर एक नयी बहस छिड़ गई है। हम बात कर रहे है देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का,बता दे कि भारत में पहली बार कोई मुस्लिम नेता देश का गृह मंत्री बना था। कई दलों के समर्थन से बनी वीपी सिंह सरकार सत्ता में थी। और इधर,आतंकवाद की आग में कश्मीर सुलगने लगा था। इसी बीच एक दिन आतंकी देश के गृह मंत्री की बेटी को ही अगवा कर लेते हैं और फिर भारत की सरकार को आतंकियों की मांगों के आगे सरेंडर करना पड़ता है।
बताते चले कि गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और महबूबा मुफ्ती की बहन रूबिया सईद का आतंकियों ने अपहरण कर लिया था,आजादी के बाद यह शायद पहली घटना थी जब कुछ गिने चुने आतंकियों ने सरकार से अपनी बात मनवा ली थी। यह घटना आतंकवाद के लिहाज से एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई। पांच आतंकियों की रिहाई के बाद आतंकियों के हौसले बढ़े और घाटी में आतंकवाद तेजी से फैल गया।
चूंकि,इस घटना को करीब 33 साल बात चुके हैं और रूबिया सईद घाटी और लाइमलाइट से दूर तमिलनाडु में रहती है तथा वह पेशे से डॉक्टर हैं। लाइमलाइट से दूर होने के बावजूद एक बार फिर उनकी चर्चा होने की बड़ी वजह यह है कि केंद्रीय जांच ऐजेंसी CBI की एक विशेष अदालत ने रूबिया को समन जारी कर 15 जुलाई को पेश होने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि वर्ष 1989 में उनके अपहरण से जुड़े मामले में पेशी का आदेश आया है। खास बात यह है कि पहली बार रूबिया सईद को मामले में पेश होने के लिए कहा गया है।
दरअसल,वर्ष 2019 में टेरर फंडिंग के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा यसीन मलिक को पकड़े जाने के बाद रूबिया फिर से सुर्खियों में आ गयी। सीबीआई ने पिछले साल जनवरी में विशेष लोक अभियोजकों मोनिका कोहली और एस. के. भट की मदद से रूबिया अपहरण मामले में मलिक सहित 10 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। रूबिया सईद को सीबीआई ने अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया है।
गौरतलब है कि आठ दिसंबर 1989, केंद्र में भाजपा के समर्थन से वी. पी. सिंह सरकार बने एक सप्ताह भी नहीं बीता था। कि इसी बीच घाटी में केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटिया रूबिया सईद के अपहरण की खबर आई। जिसके बाद श्रीनगर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया। MBBS की पढ़ाई करने वाली रूबिया (23) श्रीनगर के एक अस्पताल में इंटर्नशिप कर रही थीं। उस दिन उन्होंने रोज की तरह अपना काम खत्म करने के बाद नौगाम स्थित घर जाने के लिए मिनी बस पकड़ी थी। बस में तीन लोग आम यात्री नहीं थे। नौगाम से 500 मीटर पहले ही बस में सभी खौफजदा हो गए। बंदूकें लहराई जाने लगीं। बस रुकवाई गई और रूबिया को जबरन उतार लिया गया। वहां बगल में ही एक वैन पहले से इंतजार में खड़ी थी। देश के गृह मंत्री की बेटी अब आतंकियों के कब्जे में थी। जहां इस अपहरण की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ ने ली थी। आतंकियों ने मांग रखी कि उनके 13 साथियों को रिहा किया जाए। कुछ समय बाद वे पांच आतंकवादियों को छोड़ने की मांग किये,जहां हाई लेबल की बातचीत के बाद पांच खूंखार आतंकियों को रिहा कर दिया गया। कुछ समय बाद रूबिया को भी छोड़ दिया गया।
