एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

चीनी धमकी के बाद अमेरिकी नौसेना “नैंसी” की यात्रा को सुरक्षित करने के मिशन पर हुई सक्रिय, ताइवानी सीमा के पास 36 घातक युद्धपोतों के अलावा कई खतरनाक सबमरीन की भी की तैनाती – चंद्रकांत मिश्र/नित्यानंद दूबे


अमेरिकी युद्धपोत की फाईल फोटो,साभार-(ट्वीटर)

ताइपे/टोक्‍यो। चीन की धमकी को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी फौज अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के लिए अपनी पूरी तैयारी पर है। बता दे कि अमेरिकी नौसेना अपने महाव‍िनाशक एयरक्राफ्ट कैरियर और विशाल प्‍लेन को ताइवान की सीमा के पास तैनात कर रही है। वहीं,ताइवान की मीडिया ने भी दावा किया है कि नैंसी पेलोसी मंगलवार की शाम को राजधानी ताइपे पहुंच सकती हैं। उधर,मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए चीन ने एक बार फिर धमकी दिया है।

दरअसल,एक मीडिया रिपोर्ट्स में पहले यह दावा किया गया था कि इससे पहले अमेरिकी सेना ने नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा का विरोध किया था लेकिन अब अमेरिकी फौज नैंसी पेलोसी के विमान के लिए एक बफर जोन बनाने के मिशन पर लगातार सक्रिय है। चूंकि,चीन ने धमकी दी है कि नैंसी पेलोसी अगर ताइवान जाती हैं तो उसकी सेना चुप नहीं बैठेगी।

वहीं, इससे पहले नैंसी पेलोसी और उनके साथ सांसदों का एक दल सोमवार को सिंगापुर पहुंचा है। नैंसी पेलोसी एक सैन्‍य व‍िमान C-40C से वॉशिंगटन से रवाना हुई हैं। इस बीच सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान जारी करके कहा कि पेलोसी ने प्रधानमंत्री ली हसिइन लूंग से मुलाकात की है। पेलोसी का मलेशिया, जापान और साउथ कोरिया जाने का कार्यक्रम है। उन्‍होंने अभी तक अपनी ताइवान यात्रा के बारे में कुछ भी नहीं कहा है। उधर, अमेरिका ने महाविनाशक परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्‍ड रीगन, जापान के ओकिनावा के पास तैनात एसॉल्‍ट शिप यूएसएस त्रिपोली और यूएसएस अमेरिका को जापान के सासेबो में तैनात किया है।

इसके अलावा प्रशांत महासागर में एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन,लैंडिंग हेलिकॉप्‍टर डॉक यूएसएस इसेक्‍स, 36 अन्‍य युद्धपोत, तीन सबमरीन हवाई द्वीप में रिमपैक अभ्‍यास में हिस्‍सा ले रहे हैं। खबर है कि उन्‍हें ताइवान की ओर मोड़ा जा सकता है। वहीं अमेरिका के दो एचसी- 130 जे विमान भी ओकिनावा पहुंच गए हैं। उनके साथ कई केसी-135 टैंकर भी पहुंचे हैं जो हवा में तेल भर सकते हैं। फिलहाल,अमेरिकी नौसेना की जबरदस्त तैयारियों की जो रिपोर्ट सामने आ रही है उससे यह साफ हो गया है कि बीजिंग की एक भी गलती उसके लिए सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।

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