एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

चीनी धमकी को नजरअंदाज करते हुए स्पीकर नैंसी पहुंची ताइपे, इस दौरान उनकी सुरक्षा में 24 अमेरिकी फाइटेर एअरक्राफ्ट के साथ-साथ समुद्र में भी कई युध्दपोत और पनडुब्बीयां रही मौजूद – सतीश उपाध्याय/अमरनाथ यादव


सांकेतिक तस्वीर।

वॉशिंगटन/बीजिंग/ताइपे। अमेरिकी संसद की स्पीकर “नैंसी पेलोसी” आखिरकार बाहिफाजत ताइवान की राजधानी ताईपेई पहुंच हीं1गईं। जहां इस दौरान नैंसी की सुरक्षा में अमेरिकी नेवी और एयरफोर्स के 24 एडवांस्ड फाइटर जेट्स ने नैंसी के प्लेन को एस्कॉर्ट किया। जबकि एक दिन पहले ही अमेरिकी नेवी ने ताइवान की समुद्री सीमा में अपने सबसे घातक 36 युद्धपोतों के अलावा अन्य कई खतरनाक पनडुब्बीयों की भी तैनाती कर ली थी।

दरअसल,चीन का ढपोर शंख अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अभी हाल ही में धमकी देते हुए कहा था कि अगर नैंसी पेलोसी ताइवान में जाती है तो चीनी सेना और चीन के फाइटेर एअरक्राफ्ट उनके प्लेन को टारगेट कर सकते हैं। ऐसे में जहां यह रिपोर्ट आई कि चीन की धमकी के बाद नैंसी की ताइवान दौरा स्थगित हो गया है लेकिन फिर सोमवार को यानि एक दिन पहले ही यह दावा किया गया कि मंगलवार को हर हाल में नैंसी ताइवान का दौरा करेंगी,यही नहीं इस बीच यह भी खुलासा हुआ कि नैंसी की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नेवी बफर जोन के मिशन पर सक्रिय हो गई है। हालांकि,नैंसी सकुशल बाहिफाजत तय समय पर ताइपे पहुंच चुकी है और चीन की धमकी सिर्फ बंदर घुढ़की साबित हुई।

उधर,पेलोसी के ताइवान पहुंचने के बाद चीन ने एक बार फिर अमेरिका को धमकाते हुए कहा है कि हम टारगेटेड मिलिट्री एक्शन लेंगे। हालांकि,यह साफ नहीं किया गया कि चीन किन टारगेट पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है। जबकि अमेरिका और ताइवान ने अपनी फौजों को कॉम्बेट रेडी (जंग के लिए तैयार) रहने को कहा है।

इधर,अमेरिका और ताइवान की सेनाएं चीन से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी हैं। जहां इस दौरान अमेरिकी नेवी के 4 वॉरशिप हाईअलर्ट पर हैं और ताइवान की समुद्री सीमा में गश्त कर रहे हैं। इन पर एफ-16 और एफ-35 जैसे हाईली एडवांस्ड फाइटर जेट्स और मिसाइलें मौजूद हैं। रीपर ड्रोन और लेजर गाइडेड मिसाइलें भी तैयार हैं। अगर चीन की तरफ से कोई हिमाकत की गई तो अमेरिका और ताइवान उस पर दोनों तरफ से हमला कर सकते हैं।

उधर,चीन ने भी कार्रवाई के लिए लॉन्ग रेंज हुडोंग रॉकेट और टैंक तैयार रखे हैं। उसके पास ताइवान स्ट्रेट में दूसरे मिलिट्री इंस्टॉलेशन्स भी हैं। जिसका कि वो इस्तेमाल कर सकता है। और अमेरिकी फौज की इन हरकतों पर लगातार पैनी नजर है। तो वही,USS रोनाल्ड रीगन वॉरशिप और असॉल्ट शिप भी हाईअलर्ट पर हैं।

इसी कड़ी में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि पेलोसी के दौरे के कई दिन पहले ही अमेरिका के कई सैनिक और मिलिट्री टेक्निकल एक्सपर्ट ताइवान पहुंच चुके हैं। मिलिट्री टर्मिनोलॉजी में इसे बूट ऑन ग्राउंड कहा जाता है। दरअसल,अमेरिका अब यह तय कर चुका है कि साउथ चाइना सी या ताइवान स्ट्रेट में चीन की दादागीरी पर लगाम कसनी ही होगी।

इस बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को फिर अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि वो अमेरिकी जो पेलोसी की विजिट पर सियासत कर रहे हैं। वो आग से खेल रहे हैं। उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा।

दरअसल,चीन वन-चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है,जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश की तरह देखता है। चीन का लक्ष्‍य ताइवान को उनकी राजनीतिक मांग के आगे झुकने और चीन के कब्‍जे को मानने के लिए ताइवान को मज‍बूर करने का रहा है। जबकि अमेरिका व उसके सहयोगी देश ताइवान के साथ खड़े है। फिलहाल,तनाव अपने चरम पर है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के विश्लेषण के आधार पर अब यह साफ हो चुका है कि चीन की धमकी सिर्फ कोरी साबित होगी और कुछ भी नहीं, हां तनाव जारी रहेगा।

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