इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

अमेरिकी खुफिया ऐजेंसी (CIA) के लिए आसान टास्क नहीं था आॅपरेशन “जवाहिरी” – राकेश पांडेय/रविशंकर मिश्र


सांकेतिक तस्वीर।

काबुल/वाशिंग्टन। अमेरिकी खुफिया ऐजेंसियों के लिए आॅपरेशन “अल जवाहिरी” आसान टास्क नहीं था,इस मिशन को बखूबी अंजाम देने के लिए CIA ने बहुत मेहनत किया तब जाकर आज इस आॅपरेशन को सफलता मिली। बता दे कि आतंकी संगठन “अल कायदा” का प्रमुख ‘अयमान अल जवाहिरी’ के मारे जाने से इस आतंकी संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि वह पिछले कई सालों से अंडरकवर था। जिस वजह से वह डिटेक्ट नहीं हो पा रहा था,इसलिए इस मिशन का एक-एक कदम फूंक-फूंककर रखा जा रहा था।

दरअसल,बीते कई सालों से अमेरिकी ऐजेंसियां इस बात से वाकिफ थी कि जवाहिरी को कैसी और किस तरह से मदद मिल रही है ? अफगानिस्तान छोड़कर जाने के बाद भी CIA इस मुल्क में अलकायदा की तमाम हरकतों पर लगातार निगाह रखे हुए थी। इसी बीच इसी साल CIA को रिपोर्ट मिली कि जवाहिरी का परिवार जिसमें उसकी पत्नी,उसकी बेटी और बेटी के बच्चे शामिल थे,सभी काबुल के एक सेफहाउस में पहुंचे हैं। ठीक इसी जगह पर जवाहिरी को भी देखा गया। इसके बाद अमेरिकी ऐजेंसी उसकी निगरानी में जुट गई। ऐसे में अब CIA के सामने सिर्फ उसकी पहचान करने भर की देर थी,जहां यह साफ हो गया यही शख्स अमेरिका का मोस्ट वांटेड आतंकी अल जवाहिरी हीं है। पहचान की कार्यवाही पूरी हो जाने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन को इस बारे में ब्रीफ किया गया।

जहां बाइडेन की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद शुरू हुई ऑपरेशन की तैयारी। इसके लिए सेफहाउस की बनावट और वहां रहने वालों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई गई। अमेरिका चाहता था कि इस ऑपरेशन के दौरान स्थानीय लोगों यहां तक कि जवाहिरी की फैमिली और सेफहाउस को भी कोई नुकसान न पहुंचे। इसलिए बहुत पुख्ता ढंग से इस ऑपरेशन की तैयारी की गई। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की अहम सुरक्षा अधिकारियों और कैबिनेट सदस्यों से मीटिंग हुई। एक जुलाई को बाइडेन को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक प्रस्तावित हमले के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें यह जानकारी उनके कैबिनेट के साथियों और सीआईए डायरेक्टर विलियम बर्न्स ने दी।

इस दौरान बाइडेन को इंटेलीजेंस कम्यूनिटी द्वारा मीटिंग में लाए गए सेफहाउस के मॉडल का बारीकी से मुआयना कराया गया। उन्होंने बिजली,मौसम,कंस्ट्रक्शन मैटीरियल संबंधी उन पहलुओं पर गहराई से सवाल पूछे जो इस मिशन में बाधा बन सकते थे। इसके बाद 25 जुलाई को राष्ट्रपति बाइडेन ने फाइनल ब्रीफिंग के लिए अहम कैबिनेट सदस्यों और सलाहकारों की एक बैठक बुलाई। इसमें तमाम अन्य मुद्दों के साथ इस बात पर भी चर्चा की गई कि जवाहिरी के मारे जाने से अमेरिका और तालिबान के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा? सभी दलीलों से संतुष्ट होने के बाद राष्ट्रपति ने ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाने की सहमति दी और साथ ही ताकीद किया इस दौरान आम जनहानि न होने पाए। आखिर 30 जुलाई को रात 09.48 बजे एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत ड्रोन फायरिंग के जरिए जवाहिरी को ढेर कर दिया गया, जहां इस दौरान पूरा आॅपरेशन पहले से ही बनाये गये प्लान के मुताबिक सफल रहा तथा अमेरिकी फोर्स को कोई भी नुकसान नहीं हुआ।

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