
सांकेतिक तस्वीर।
श्रीनगर। भारत ने पाकिस्तान को सोमवार को लश्कर-ए-तैयबा के उस आतंकी का शव सौंप दिया जो बीते 21 अगस्त को अपने कई साथी आतंकियों के साथ LOC क्रास करते समय भारतीय सुरक्षाबलों के शूट आऊट में घायल हो जाने के बाद पकड़ लिया गया था। हालांकि इस दौरान इसके सभी साथी भागने में कामयाब रहे। वहीं इस घायल आतंकी को भारतीय सुरक्षाबलों ने एक सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया जहां वह होश में आने पर कई चौंकाने वाला खुलासा किया था लेकिन 13 दिनों बाद इसी अस्पताल में हार्ट अटैक दौरान यह मर गया। बता दे कि पिछले 20 सालों में यह पहला मौका है जब पाकिस्तान ने एक आतंकी को अपना नागरिक मानते हुए बिना किसी चूं चा के इसका शव लिया। वर्ना इसके पहले पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों में शामिल अपने नागरिकों के शव लेने से हमेशा इंकार करता रहा है।
दरअसल,पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के कोटली के सब्जकोट गांव के निवासी तबारक हुसैन (32) ने पिछले महीने 21 अगस्त को राजौरी के नौशेरा सेक्टर से में LOC पर घुसपैठ करने की कोशिश करते हुए भारतीय सुरक्षाबलों के गोलाबारी के दौरान घायल हो जाने के कारण पकड़ लिया गया था। जहां इस दौरान उसे पैर और कंधे पर गोली लग गई थी। सुरक्षाबलों ने उसे अस्पताल भर्ती करवाया,जहां उसका ऑपरेशन भी किया गया। यहां तक कि भारतीय सैनिकों ने उसकी जान बचाने के लिए तीन यूनिट रक्तदान भी किया लेकिन अस्पताल में 13वें दिन यानि बीते शनिवार को हार्ट अटैक के दौरान वह मर गया।
जब वह जीवित था उसने पूछताछ में खुलासा किया कि उसे व उसके अन्य 4 साथी आतंकियों को पाकिस्तानी ऐजेंसी की तरफ से भारतीय पोस्ट पर घातक हमले टास्क दिया गया था। आगे उसने यह भी बताया कि जब वह भारतीय सुरक्षाबलों की गोलाबारी में घायल हो गया तो उसके अन्य साथी आतंकी उसे बचाने बजाय उसे छोड़कर भाग निकले। हालांकि इलाज के दौरान वह 13वें दिन मर गया जहां भारत ने सभी जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए उसके शव को पाकिस्तान को सौंप दिया। वहीं भारतीय सेना के सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई कि पिछले 20 सालों में यह पहला मौका है कि जब पाकिस्तान ने भारत में मरे किसी आतंकी को बतौर अपना नागरिक मानते हुए उसके लिया वर्ना इससे पहले वह ऐसे आतंकियों को कभी अपना नागरिक माना ही नहीं।
