
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंसकी, साभार-(सोशल मीडिया)
ब्रसेल्स। रूस-यूक्रेन जंग में बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जहां इस दौरान खुलासा किया गया है कि इस लड़ाई में यूक्रेन को हथियार देते-देते यूरोपीय संघ के देशों और नाटों देशों के शस्त्रागार अब खाली होने को है। अब इन देशों पर खुद की रक्षा करने को लेकर खतरा मंडराने लगा है। यूरोपीय संघ (ईयू) के एक शीर्ष राजनयिक ने सोमवार को आगाह किया कि अब नाटों संगठन के देशों में हथियारों का भंडार कम हो चुका है।
उन्होंने आगे यह भी बताया कि ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों ने यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद की लगातार आपूर्ति की है। राजनयिक ने ईयू के सदस्यों से सैन्य साजोसामान पर अपने खर्च को बेहतर ढंग से समन्वयित करने का आग्रह भी किया। इतना ही नहीं उन्होंने आगे यह कहा कि यूरोपीय देश पहले से ही रूस की धमकियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल अपने हथियारों के भंडार को बढ़ाना होगा।
दरअसल,यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने यूरोपीय सांसदों के साथ सोमवार को एक बहस में कहा कि अधिकतर सदस्य देशों के सैन्य स्टॉक, मैं यह नहीं कहूंगा कि समाप्त हो गए हैं, लेकिन काफी कम हो गए हैं, क्योंकि हम यूक्रेन के लोगों को बहुत अधिक क्षमता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सैन्य साजोसामान की संख्या फिर से बढ़ानी होगी और इसका सबसे अच्छा तरीका मिल कर ऐसा करना रहेगा जो किफायती भी हो।
बता दे कि इससे पहले पिछले हफ्ते चेक गणराज्य में एक बैठक के दौरान, यूरोपीय संघ के रक्षा मंत्रियों ने सैन्य सामग्री और संसाधनों को लेकर चर्चा की थी इसके साथ उन्होंने गोला-बारूद और वायु रक्षा प्रणालियों जैसे हथियारों की थोक खरीद पर भी चर्चा की थी जिनकी अभी यूक्रेन को आवश्यकता है। वहीं,अमेरिका भी लगातार यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई कर रहा है। नाटों देश भी अमेरिका का साथ देने के लिए अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। अधिकतर यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं। ऐसे में उन्होंने अपने हथियारों के भंडार को काफी सीमित रखा है। यही कारण है कि यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई करने के काऱण उनके खुद के भंडार खाली होने लगे हैं।
इसी क्रम में “सीक्रेट आॅपरेशन” न्यूज पोर्टल ने इस जंग से जुड़े तमाम रिपोर्ट्स का विश्लेषण किया तो यह साफ हो गया कि उल्लिखित खुलासे में बल है। क्योंकि,अभी हाल ही में एक और खुलासा सामने आया था जिसमें दावा किया गया था कि बीते अगस्त में एक ब्रिटिश प्लेन लगातार पाकिस्तान से गोला-बारूद यूक्रेन को पहुंचा रहा है। जबकि जारी जंग के दौरान यह पहली बार था जब पाकिस्तान द्वारा निर्मित गोला बारूद रूस के खिलाफ बेहद गोपनीय तरीके से इस्तेमाल किये जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। बता दे कि इस खुलासे में जिस ब्रिटिश प्लेन का जिक्र किया गया था उसकी पूरी फ्लाइट ट्रेकिंग की भी रिपोर्ट को सामने लाया गया था जबकि अब तक की लड़ाई में सिर्फ नाटों और EU ही सामने थे लेकिन अगस्त में पाकिस्तान की गोपनीय भूमिका ने जोसेप बोरेल के दावें को बल दे दिया है। इसी कड़ी में हम एक और रिपोर्ट का जिक्र कर रहे हैं। दरअसल,जंग के कुछ महिनों बाद ही ब्रिटिश खुफिया ऐजेंसियों ने यह दावा किया था कि रूस का गोला बारूद अब खत्म होने के कगार पर है इसलिए अब वह अन्य घातक मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन रूस तो रूस है वह इस जंग में कच्छप चाल चलता रहा, अब हालात यह है कि कल तक जो लोग रुस के स्टाक को कम होने का दावा कर रहे थे अब वह लोग खुद ही इसके भुक्तभोगी बने बैठे हैं।
