
रूसी राष्ट्रपति पुतिन, साभार-(सोशल मीडिया)
मॉस्को। रूस-यूक्रेन के बीच जारी भीषण जंग के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को ललकारते हुए कहा कि मॉस्को अपने उद्देश्यों को हासिल करने तक यूक्रेन में अपनी मिलिट्री ऑपरेशन लगातार जारी रखेगा। उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रतिबंधों के जरिये रूस को अलग-थलग करने संबंधी पश्चिमी देशों के प्रयासों का उपहास भी किया।
बता दे कि पुतिन ने सुदूर पूर्वी बंदरगाह शहर व्लादिवोस्तोक में आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में कहा कि यूक्रेन में सेना भेजने के पीछे आठ साल की लड़ाई के बाद उस देश के पूर्वी क्षेत्र में नागरिकों की रक्षा करना मुख्य लक्ष्य था। उन्होंने कहा कि हम वे लोग नहीं हैं, जिन्होंने सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, हम इसे समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन ने यह भी बताया कि इस अभियान के दौरान हमने कुछ नहीं खोया है।
इसी कड़ी में पुतिन ने आगे यह भी साफ किया कि उन्होंने यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादी क्षेत्रों की रक्षा के लिए यूक्रेन में सेना भेजी, जिन्होंने 2014 में क्रीमिया के रूस के कब्जे के बाद भड़के संघर्ष में यूक्रेनी सेना से लड़ाई लड़ी है। पुतिन ने कहा कि हमारी सभी कार्रवाई का उद्देश्य डोनबास में रहने वाले लोगों की मदद करना है, यह हमारा कर्तव्य है और हम इस लक्ष्य को हासिल करके रहेंगे। पुतिन ने कहा कि रूस ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना करते हुए अपनी संप्रभुता को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि रूस ने पश्चिम के आर्थिक, वित्तीय और तकनीकी हमले का जवाब दिया है।
इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि रूस में आर्थिक ओर वित्तीय स्थिति स्थिर हो गई है, उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति कम हो गई है और बेरोजगारी दर भी कम बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस अपने वैश्विक प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए किसी भी दुस्साहस का सामना करते हुए अपनी संप्रभुता की रक्षा करना जारी रखेगा।
गौरतलब है कि इस साल बीते 24 फरवरी से यूक्रेन के खिलाफ रूस लगातार मिलिट्री ऑपरेशन जारी रखे हुआ है। जिस वजह से यूक्रेन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं काउंटर में यूक्रेन भी रुसी फौज को भारी क्षति पहुंचाया है। जहां इस दौरान अमेरिकी गुट के तमाम देश रूस पर कई तरह के प्रतिबंधों के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिये है। हालांकि इन प्रतिबंधों को लेकर पुतिन ने अब साफ कर दिया कि इसका उनके देश पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं है।
