
सांकेतिक तस्वीर।
काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक एजुकेशन इंस्टीट्यूट में शुक्रवार को बेहद भयानक बम विस्फोट हो जाने से 19 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई है। वहीं अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है। इसी बीच यह भी दावा सामने आया है कि तालिबान ने हॉस्पिटल के मालिक को धमकी दी है कि वो कोई भी जानकारी मीडिया को लीक न करे।
वहीं,काबुल पुलिस के स्पोक्सपर्सन खालिद जादरान के हवाले से बताया गया है कि हमला अफगान के नॉर्थ रीजन के एजुकेशन इंस्टीट्यूट में हुआ है और यह फिदायीन हमला था। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यहां ज्यादा आबादी हजारा (शिया मुस्लिमों की जाति) मुस्लिमों की है। ये समूह पिछले कुछ महीनों से लगातार आतंकियों के निशाने पर है
बता दे कि तालिबान के राज में ये आत्मघाती हमला बच्चों पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक है। इससे पहले 2014 में पाकिस्तान के पेशावर शहर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर तालिबान आतंकियों ने हमला किया था। 132 बच्चों सहित 141 लोगों की मौत हो गई थी। हमले के वक्त स्कूल में स्टाफ सहित कुल 1100 लोग थे।
बताते चले कि आतंकियों ने सेना से बचने के लिए बच्चों को बंधक बनाने के बाद उन्हें मानव ढाल बनाकर स्कूल में एंट्री की थी। आर्मी की जवाबी कार्रवाई के दौरान छह आतंकियों ने खुद को बम से उड़ा लिया था। तीन सेना की गोली से मारे गए थे।
गौरतलब है कि तालिबान अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। उसका दावा है कि वो अफगानिस्तान और उसके लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। लेकिन, हाल के कुछ महीनों में अफगान की मस्जिदों और आबादी वाले क्षेत्रों को आतंकवादी संगठन लगातार निशाना बना रहें हैं।
इससे पहले इस महीने में ये तीसरा बड़ा हमला है। इससे पहले 2 सितंबर को एक आफगानिस्तान के हेरात प्रांत की गुजरगाह मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद बम विस्फोट से 14 लोगों की मौत हो गई थी। 200 लोग बुरी तरह से घायल हुए थे। धमाके में मस्जिद के इमाम मौलवी मुजीब रहमान अंसारी की मौत भी हो गई थी। अंसारी तालिबान से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में से एक थे। मौलवी मुजीब रहमान अंसारी को तालिबान का करीबी और एक कट्टरपंथी मौलवी माना जाता था। हेरात के गर्वनर ने अपने इस बयान में इसे भी आत्मघाती हमला बताया था।
