
सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली। हाल ही में PFI के खिलाफ केंद्रीय ऐजेंसियों ने जिस तरह से देश के कई राज्यों में जबरदस्त छापेमारी की कार्यवाही करते हुए अपने इस स्पेशल ऑपरेशन को अंजाम दिया,बेहद चौंकाने वाला है। क्योंकि,ऐजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने इस पूरे आॅपरेशन के बारे में जिस तरह से दावा किया है अपने आप में बेहद हैरान कर देने वाला। दरअसल, PFI के खिलाफ रेड से पहले रात को 12 बजे संबंधित राज्यों के पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पीएफआई के खिलाफ की जाने वाली जानकारी शेयर की गई थी जिससे रेड की जानकारी बाहर लीक न हो।
बता दे कि संगठन के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी से पहले खुफिया ऐजेंसियों ने पीएफआई के सभी बड़े नेताओं की करेंट लोकेशन की पुख्ता जानकारी जुटाई थी। पीएफआई के जिन नेताओं के यहां छापे डाले जाने थे उनका जीपीएस लोकेशन पिन-प्वाइंट कर एनआईए और ईडी को मुहैया कराई गई थी जिससे रेड के लिए जाने वाली टीम सही ठिकाने पर कारवाई करे।
इसके लिए कई महीनों से पीएफआई के हर बड़े काडर पर खास नजर रखी जा रही थी। पीएफआई के खिलाफ किये जाने वाली कार्रवाई की सीक्रेसी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि रेड से कुछ ही घंटे पहले राज्यों की पुलिस को इसकी जानकारी शेयर की गई थी।
सूत्र बताते है कि पीएफआई के खिलाफ रेड से पहले रात को 12 बजे राज्यों की पुलिस के साथ पीएफआई के खिलाफ की जाने वाली जानकारी शेयर की गई थी जिससे रेड की जानकारी बाहर लीक न हो। पीएफआई नेताओं की जीपीएस लोकेशन एनआईए और ईडी की टीम को दिये गये थे जिससे छापे करने वाली टीम कहीं गलती से गलत लोकेशन पर रेड न कर दे। यहीं नहीं छापे से एक दिन एक बार फिर से सभी पीएफआई नेताओं की करेंट लोकेशन की जानकारी हासिल की गई थी जिससे कोई भी पीएफआई का बड़ा काडर बच न पाये।
दरअसल,देश के कई राज्यों में पिछले कुछ महीनों से लगातार हिंसा और आतंक से जुड़े मामलों में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया यानी पीएफआई से जुड़े संदिग्धों का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित थी। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक ,केरल जैसे राज्यों में हुए हिंसा में पीएफआई से जुड़े आरोपियों का नाम सामने आने से ये जरुरी हो गया था कि उस पर कड़ी कारवाई की जाये। ऐसे में देश के गृह मंत्री अमित शाह बीते 29 अगस्त को सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की।
जहां इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आईबी चीफ तपन डेका समेत रॉ चीफ सामंत गोयल भी मौजूद थे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने सभी एजेंसियों को ये निर्देश दिया कि पीएफआई और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी इकट्ठी की जाये। सभी एजेंसियों को अलग अलग जानकारियों को इकट्ठा करने को कहा गया। इस दौरान पीएफआई के खिलाफ ऑपरेशन का कोड नेम ऑपरेशन “ऑक्टोपस” रखा गया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर रेड से पहले खुफिया ऐजेंसियों आईबी और रॉ ने पीएफआई की गतिविधियों की अहम जानकारियां इकट्ठी की थी जिसमें उसके कैडर और उनके नेताओं से जुड़ी जानकारियों वाली एक डोजियर तैयार किया था। छापे से पहले पीएफआई के डोजियर को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुहैया कराई गई थी। इतना ही नहीं ऑपरेशन से पहले आधी रात को दिल्ली में एक स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया गया था। जो कि वह सीधे गृह मंत्री को लगातार ऑपरेशन के संबंध में रिपोर्ट कर रहा था। मालूम हो कि ऑपरेशन की रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और आईबी चीफ तपन डेका भी इसी कंट्रोल रूम में मौजूद थे।
इसके बाद इस स्पेशल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एनआईए और ईडी ने संबधित राज्यों की पुलिस के साथ पीएफआई के 93 लोकेशन पर जबरदस्त छापेमारी की कार्यवाही की इस दौरान कुल पीएफआई के 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। रेड के अगले ही दिन एक बार फिर से गृह मंत्री अमित शाह ने एनएसए अजीत डोभाल और एनआईए चीफ दिनकर गुप्ता के साथ बैठक की।
इस दौरान पीएफआई के खिलाफ हुए कुछ रेड ऐसे लोकेशन पर हो रही थी जिससे एनआईए और ईडी टीम की सुरक्षा को खतरा था। ऐसे में छापे को इस तरह से प्लान किया गया कि सुबह जब तक सभी को ये पता चलता कि पीएफआई पर रेड हो रही थी सभी टीमें सुरक्षित अपने ठिकानों पर लौट आये और ऐसा ही हुआ यानि सुबह आठ बजे तक आॅपरेशन को लीड कर रही ऐजेंसी की ज्यादातर टीमें अपने टास्क को पूरा करके सुरक्षित लौट चुकी थी।
