
सांकेतिक तस्वीर।
बेलग्रेड। इस साल के जून से ही संप्रभुता का तनाव झेल रहे रूस के अजीज दोस्त ‘सर्बिया’ ने रूसी हथियारों से लैश अपनी फौज को ‘कोसोवो’ की सीमा पर भेज दी है जिससे यूरोप के एक अन्य इलाके में जंगी तनातनी बढ़ गई है। चूंकि,सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो के हवाले से यह दावा किया गया है कि सर्बिया ने बड़े पैमाने पर अपनी सेना को कोसोवा की सीमा पर भेजा है। बता दे कि यह तनाव ऐसे समय पर बढ़ा है जब कोसोवो की सरकार ने सर्बिया के लोगों के खिलाफ कई नए प्रतिबंध लगाए हैं।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सर्बिया की सेना के कई सैन्य वाहन कथित रूप से कोसोवो की सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। दरअसल, सर्बिया और कोसोवो के बीच संप्रभुता का मसला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यह विवाद इस साल गर्मियों में उस समय बढ़ गया जब कार प्लेट और आईडी कार्ड को लेकर कोसोवो ने नई शर्त रख दी। कोसोवो की सरकार एक कानून को लागू करना चाहती है जो ठीक उसी तरह की हैं जिसे सर्बिया ने कोसोवो के लोगों के लिए लागू कर रखी हैं।
क्योंकि,कोसोवो की नीतियों से सर्बिया के वे लोग भड़क उठे हैं जो कोसोवो में रहते हैं। इससे सर्बिया की सरकार भी आगबबूला हो गई है जो अभी तक कोसोवा की स्वतंत्रता को नहीं मानती है। सर्बिया मूल के लोगों के उग्र प्रदर्शन के बाद कोसोवो की सरकार ने नए कानूनों को लागू करने को स्थगित कर दिया है। कार प्लेट को लेकर नए कानून को 1 अगस्त से लागू होना था। जहां कोसोवो ने आरोप लगाया है कि सर्बिया उसकी सीमा पर प्रदर्शनकारियों को भेजकर उसके देश को सक्रिय रूप से अस्थिर करना चाहता है।
वहीं,यूरोप में अचानक इस ताजे जंगी तनाव से यूरोपीय संघ सकते में आ गया है। बता दे कि इससे पहले नाटों ने इस साल के अगस्त में कहा था कि वह यूरोप में एक और युद्ध को रोकने के लिए ‘हस्तक्षेप करने को तैयार है।’ यूरोपीय संघ ने कोसोवो के नए कानून का समर्थन किया है लेकिन सलाह दी है कि वह इसे थोड़े लंबे समय में लागू करे। लेकिन इस बात को लेकर भी चिंता है कि इसे टालने से भी दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं होगा। अब सर्बिया के कोसोवो की सीमा पर सेना के तैनात करने से संघर्ष के भड़कने की चेतावनी दी जा रही है।
गौरतलब है कि सर्बिया के साथ 1990 के दशक में खूनी जंग लड़ने के बाद कोसोवो ने साल 2008 में आजादी का ऐलान किया था। उधर, सर्बिया की सरकार का कहना है कि यह स्वतंत्रता का ऐलान अवैध है। इसके बाद सर्बिया ने रूस और चीन के साथ हाथ मिला लिया। चीन ने पिछले दिनों सर्बिया को अपना सबसे घातक एयर डिफेंस सिस्टम दिया था। कोसोवो की आंशिक स्वतंत्रता की वजह से यह अभी न तो संयुक्त राष्ट्र और न ही नाटों का सदस्य देश है। हालांकि नाटों ने जून 1999 से ही अपने 3770 सैनिकों को शांति मिशन के लिए तैनात कर रखा है।
फिलहाल, अचानक इस ताजे तनाव के चलते यूक्रेन में पहले से ही चल रहे नाटों का मिशन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में नाटों हर हालत में यहां स्थिति सामान्य करने की कोशिश करेगा। लेकिन सर्बिया मानेगा नहीं, क्योंकि वह सीधे रूस और चीन के साथ जुड़ा हुआ है। बता दे कि एक तरफ पूरा यूरोप जहां रूस के खिलाफ खड़ा है तो वही दूसरी ओर यूरोप के कुछ देश जैसे सर्बिया रूस के साथ है। ऐसे में नाटो के सामने यह नया जंगी तनाव मुश्किल हालात पैदा करेंगे जो कि रूस के पक्ष में होगा।
