एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

रूस-यूक्रेन जंग के बीच जर्मनी से तहलका मचाने वाली रिपोर्ट आई सामने, बर्लिन में तख्तापलट की साजिश में दो दर्जन से अधिक लोगों को किया गया गिरफ्तार, शक की सुई रूस पर – राकेश पांडेय/अमरनाथ यादव


सांकेतिक तस्वीर,फोटो साभार -(जर्मन डिफेंस मिनिस्ट्री के ट्वीटर से)

बर्लिन। रूस-यूक्रेन जंग के बीच नाटों सदस्य देश जर्मनी की राजधानी बर्लिन से तहलका मचाने वाली रिपोर्ट सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि जर्मनी में तख्तापलट के लिए आतंकी साजिश रचने के आरोप में 25 लोगों को हिरासत में लिया गया है। दरअसल,एक इंटल इनपुट के आधार पर बुधवार की सुबह लगभग 3 हजार पुलिस के जवानों ने जर्मनी के 16 में से 11 राज्यों में सर्च ऑपरेशन चलाया। जहां इस दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘रीच्सबर्गर’ से जुड़े लोगों को पकड़ा गया है।

बता दे कि पकड़े गए लोगों में 72 साल के रिटायर्ड मिलिट्री कमांडर और राइट विंग पार्टी के पूर्व एमपी भी शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि 25 लोगों का एक समूह पार्लियामेंट में जबरन हथियारों के साथ घुसने के एक सीक्रेट मिशन पर था। इनमें से 22 लोग जर्मनी के नागरिक हैं। बाकी 3 लोगों में से एक रूसी महिला भी है जो इन लोगों का समर्थन कर रही थी।

लेकिन इसके पहले ये समूह अपने इस टाॅप सीक्रेट मिशन को अंजाम दे पाते कि इन लोगों के बारे में इंटल इनपुट सामने आ गया जिससे फौरन जर्मन ऐजेंसियां हरकत में आ गई, उसके बाद जर्मनी की स्पेशल फोर्स KSK के साथ एक ज्वाइंट आॅपरेशन के दौरान इन लोगों को दबोच लिया गया। इस दौरान कई और भी संदिग्धों को डिटेन किया गया है। इस बीच खाड़ी देशों से संबंध रखने वाले एक बड़े मीडिया समूह ने जर्मनी में गिरफ्तार किये गये इन लोगों के पास बेहद खतरनाक हथियारों की मौजूदगी का दावा किया है।

इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि इस समूह को लीड करने वाला लीडर 71 साल का हाइनरिक है जो ईस्टर्न जर्मनी के शाही परिवार का वंशज है। साथ ही जर्मनी के पैराट्रूपर बैटालियन का सीनीयर फील्ड अफसर रुडगर वॉन पी भी इसका साथी बताया जा रहा है। इतना ही नहीं जर्मन फौज के कई सैनिकों के भी इस तरह के अल्ट्रा राइट विंग संगठनों से जुड़े होने की रिपोर्ट हैं। जो जबरन जर्मनी की पार्लियामेंट में घुसने का प्लान बना रहे थे।

वहीं,तख्तापलट की इस नाकाम साजिश में पकड़ी गई एक रूसी महिला की संलिप्तता में रूसी साजिश की भी आशंका जताई जा रही है। क्योंकि,रूस की यह महिला पकड़े गए लोगों को रूस से मदद दिलाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि,अभी तक ये साफ नहीं हो सका है कि इस संगठन की तरफ से रूस में किस से संपर्क किया गया था। फिलहाल,रूस ने इस तरह के किसी भी मामले की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया है। क्योंकि,रूसी प्रवक्ता ने कहा कि यह जर्मनी का आंतरिक मामला है।

गौरतलब है कि जर्मनी में पिछले तीन सालों में वहां की फोर्स ने 327 कर्मचारियों को चरमपंथी संगठनों के संपर्क में होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इन में से कई लोग तो उन कार्यक्रमों का भी हिस्सा थे जो हिटलर के समर्थन वाले नारे लगाते हैं। पकड़े गए 327 लोगों में से 83 लोग फौज के थे। अब ऐसे में इसे रूसी साजिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, गिरफ्तार किये गये लोगों से पूछताछ जारी है जिससे अभी और भी जानकारियों का सामने आना बाकी है।

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