
सांकेतिक तस्वीर।
वॉशिंगटन। रूस-यूक्रेन जंग के बीच पिछले कुछ महिनों से अमेरिका,यूक्रेन को महाशक्तिशाली पेट्रियट मिसाइल देने की ना नुकूर करने के बाद अब इस घातक मिसाइल के देने की तैयारी में जुट गया है। क्योंकि,अमेरिकी रक्षा मंत्रालय जल्द ही इसका औपचारिक ऐलान कर सकता है। बता दे कि अमेरिका और नाटों इस फरवरी में रूसी आक्रामण के शुरूआत से ही यूक्रेन को हथियार भेज रहे हैं। जिसमें HIMARS जैसे खतरनाक रॉकेट सिस्टम भी शामिल हैं, जिसने रूस को भारी नुकसान पहुंचाया है। उधर, रूस ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यूक्रेन को दिया गया हर हथियार उसका लीगल टारगेट है।
इतना ही नहीं अमेरिका ने नाटों देशों पर भी यूक्रेन को और भी बेहतर तथा घातक हथियार देने का दबाव डाला है। युद्ध की शुरूआत के कुछ महीनों तक इन देशों ने यूक्रेन को भारी मात्रा में हथियार दिए। दरअसल,30 नवंबर को बुखारेस्ट में हुई बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि अब तक नाटो ने यूक्रेन को 40 बिलियन डॉलर के हथियार भेजे हैं। ये फ्रांस के रक्षा बजट के बराबर है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को और हथियारों की जरूरत है। नाटो देशों के पास हथियारों की कमी पहले से है। ऐसे में अमेरिका अपने राजनयिकों के माध्यम से दुनियाभर के देशों से यूक्रेन के लिए हथियारों की व्यवस्था कर रहा है।
दरअसल,रूस-यूक्रेन जंग के शुरूआत से अमेरिका और नाटों की भूमिका को लेकर रूस की भौंहें पहले से ही तनी हुई है, वहीं अब पेट्रेयिट मिसाइल देने की रिपोर्ट गुस्से की आग में जल रहे रूस की और भी क्रोध भढ़काने के लिए काफी होगा। अब यहां विचार करने वाली बात यह है कि इस जंग में रूस को ज्यादा से ज्यादा सभी मोर्चे पर भारी नुकसान पहुंचाने में अमेरिका और नाटों लगातार हरकत में है और क्रेमलिन अभी तक अमेरिका या नाटों कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका है। ऐसे में सवाल उठता है कि रूस अपने इन दुश्मनों से निबटने के लिए कोई सीक्रेट प्लान बनाया है या ऐसे ही इस जंग में उलझा रहेगा ?
