
सांकेतिक तस्वीर।
श्रीनगर। नये साल के पहले दिन और दूसरे दिन जम्मू के राजौरी के डांगरी गांव में आतंकी हमले के दौरान मारे गए मृतकों के अंतिम संस्कार से पहले गांव के मेन चौक पर जमा हुए लोगों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से डांगरी आने की मांग की। हालांकि,बाद में आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी तादाद में लोग डांगरी पहुंचे। बता दे कि दो दिनों में 6 लोगों की मौत के बाद लोगों की आंखें नम और उनमें पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा था।
इस बीच डांगरी के सरपंच धीरज शर्मा के हवाले से यह दावा किया गया कि क्षेत्र में एक ग्राम रक्षा समिति (VDC) थी, लेकिन पुलिस ने 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों से हथियार ले लिए थे। उन हथियारों को फिर से अलॉट भी नहीं किया गया। अगर VDC के लोगों के पास हथियार होते तो वे रविवार को आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते। धीरज शर्मा का कहना था कि पाकिस्तान अपनी करतूतों से बाज नहीं आने वाला है। ऐसे में अब लोग अपनी सुरक्षा के लिए हथियार उठाने को तैयार हैं। हालांकि,जम्मू पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने साफ कर दिया कि “ग्राम रक्षा समिति” से अब बंदूके वापस नहीं ली जायेगी।
वहीं,एक खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी आतंकवादी भारत में घुसपैठ के लिए राजौरी सेक्टर में LOC पर फॉरवर्ड डिफेंस लोकेशन को निशाना बना रहे हैं। राजौरी सेक्टर के पास पाकिस्तान की तरफ चार लॉन्चिंग पैड हैं। लगभग 25-30 आतंकवादी कोटली, लंजोटे, निकल और खुइरेटा में इन लॉन्चिंग पैड्स का उपयोग करके भारत में घुसपैठ करने की योजना बना रहे हैं।
गौरतलब है कि नये साल के पहले दिन यानि रविवार को शाम के समय राजौरी के डांगरी गांव में आतंकवादी आए और लोगों को घरों से बाहर निकाला। वे सभी का आधार कार्ड देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले में सतीश कुमार (45), प्रीतम लाल (56), शिवपाल (32) की मौत हो गई। चौथे मृतक का नाम अभी सामने नहीं आया है। इन लोगों के मारे जाने के दूसरे दिन यानि सोमवार को सुबह के समय इस सामूहिक हत्या के विरोध जैसे ही प्रदर्शन शुरू हुआ, तभी IED ब्लास्ट हो गया, बताया जा रहा है कि यह विस्फोट उन घरों में से एक घर में हुआ जिनमें आतंकियों ने लोगों को मारा था। वही इस विस्फोट की चपेट में आने से दो बच्चियों की मौत हो गई और 4 घायल हो गए हैं।
