
सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख बार्डर पर दुश्मन के साथ जारी भीषण जंगी तनातनी के बीच भारतीय पुलिस अधिकारियों द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट में चीन की भारत के खिलाफ खूनी साजिश को लेकर हड़कंप मचाने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन सीमा के बेहद नजदीक अक्रामक रूप से सेना की तैनाती कर रहा है। इस बीच इन पुलिस अधिकारियों ने दुश्मन के इस हरकत को काउंटर करने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए हैं।
बता दे कि इन भारतीय अधिकारियों के इस रिपोर्ट के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि लद्दाख क्षेत्र में चीन की काफी अधिक आर्थिक और रणनीतिक जरूरत है, और यही वजह है कि वह बेहद आक्रामक तरीके से अपनी सेना की तैनाती कर रहा है ताकि वह भारत की ओर अधिक क्षेत्रों पर दावा करने के लिए बिना बाड़बंदी वाले स्थानों पर दबदबा कायम कर सके। इस रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया कि आने वाले समय में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के सैनिकों में और भी झड़पें हो सकती है। मालूम हो कि इससे पहले यह खुलासा हुआ था कि भारत ने 65 में ऐसे 26 पेट्रोलिंग पॉइंट पर अपना नियंत्रण खो दिया है, जहां बीएसएफ की पेट्रोलिंग नहीं हो रही थी।
दरअसल,पिछले सप्ताह हुई पुलिस महानिदेशकों/पुलिस महानिरीक्षकों की बैठक में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए संबंधित दस्तावेज में कहा गया है कि देश की सीमा रक्षा रणनीति को भविष्य के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के साथ एक नया अर्थ और उद्देश्य दिया जाना चाहिए। इसी कड़ी में आगे भी कहा गया कि रणनीति को क्षेत्र-विशिष्ट बनाया जाना चाहिए, उदाहरण के लिए तुरतुक या सियाचिन सेक्टर और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) या देपसांग मैदान में सीमा पर्यटन को आक्रामक रूप से बढ़ावा दिया जा सकता है।
डीबीओ में काराकोरम दर्रे के बारे में दस्तावेज में कहा गया कि इसका भारत के रेशम मार्ग के इतिहास से एक प्राचीन संबंध है, और घरेलू पर्यटकों के लिए क्षेत्र खोलने से इसके दूरदारज स्थित होने का विचार खत्म होगा। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि दर्रे पर साहसिक अभियानों को फिर से शुरू किया जा सकता है और ट्रेकिंग और लंबी पैदल यात्रा के क्षेत्रों को सीमित तरीके से खोला जा सकता है। इसमें कहा गया कि पूर्वी सीमा क्षेत्र में चीन की काफी अधिक आर्थिक और रणनीतिक आवश्यकता है और वह आक्रामक रूप से अपनी सेना की तैनाती कर रहा है, ताकि वह भारत की ओर गश्त बिंदुओं (पीपी) से चिह्नित गैर-बाड़बंदी वाले क्षेत्रों पर दावा जताने के लिए दबदबा कायम कर सके।
गौरतलब है कि बीते सप्ताह में तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और देश के करीब 350 शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया था। जहां इस दौरान भारत के खिलाफ चीन के द्वारा की जा रही खूनी साजिश का भारतीय पुलिस अधिकारियों ने पर्दाफाश किया है। अब भारत सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर दुश्मन के खिलाफ आगे क्या कार्यवाही करती है ? यह अभी कह पाना मुश्किल है। लेकिन अब एक बात साफ हो चुकी है कि भारत को जल्द से जल्द दुश्मन के खिलाफ बेहद प्रभावी कदम उठाने की सख्त ज़रूरत है। क्योंकि,देश के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भी चीन की मंशा को लेकर कई बार सवाल खड़े कर चुके हैं। इतना ही नहीं अभी हाल ही में बीते 9 दिसंबर को भारतीय सीमा में चीनी सेना की घुसपैठ को नाकाम करने के दौरान झड़प हो गई थी, जबकि इससे पहले गलवान में भी इसी तरह के हिंसक झड़प को चीनी सेना ने अंजाम दिया था।
