
भारतीय सैनिक,फाईल फोटो,साभार-(इंडियन आर्मी के ट्वीटर से)
नई दिल्ली/वाशिंग्टन। पूर्वी लद्दाख बार्डर पर दुश्मन की जारी भारत विरोधी हरकतों को लेकर अब अमेरिका भी ऐक्शन मोड में आ गया है। दरअसल,अब कई रिपोर्ट्स में यह खुलासा हो चुका है कि LAC बार्डर पर चीन की नियत बिल्कुल भी ठीक नहीं है। क्योंकि,अभी हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सीमा पर लगे अपने सैनिकों से मुलाकात की है। इसके बाद यूएस ने कहा कि भारत को पैनी नजर रखनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों से मुलाकात की है। वहीं,भारत के आर्मी चीफ हों या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दोनों ने भी हाल ही में अरुणाचल से सटी सीमा का दौरा किया था और अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया था। इस बीच अमेरिका ने भी कहा कि LAC में किसी भी तरह के एकतरफा प्रयास और घुसपैठ का वो विरोध करता है। इतना ही नहीं अमेरिका ने यहां तक कहा है कि अगर कोई भी एकतरफा कार्रवाई होती है तो इसकी तुरंत जांच और डटकर मुकाबला करना चाहिए।
दरअसल,अमेरिका के उप प्रेस प्रवक्ता वेदांत पटेल ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा स्थिति को वो बारीकी से निगरानी कर रहा है। पटेल ने आगे भी कहा कि हम सीमा पार या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ, सैन्य या नागरिक द्वारा क्षेत्रीय दावों को आगे बढ़ाने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध करते हैं। इसी कड़ी में पटेल ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत और चीन से अपील करता है कि वो अपने विवादित बिंदुओं पर बातचीत करके कोई समाधान निकाले।
वहीं,एक दिन पहले इंडियन आर्मी के ईस्टर्न कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल आर पी कालिता ने भी कहा कि चीन के साथ पूर्वी सीमा पर हालात ‘स्थिर’ हैं लेकिन सीमा के बारे में अपरिभाषित धारणाओं के कारण उसको लेकर पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। बता दे कि
अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की निगरानी का जिम्मा भारतीय सेना के पूर्वी कमान पर है। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कालिता ने यह भी कहा कि सेना सीमा पार गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी उभरती चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उल्लेखनीय हैं कि अभी बीते 9 दिसंबर को अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में दुश्मन के साथ भारतीय सैनिकों की झड़प हुई थी। इसके पहले गलवान में भी इसी तरह से संघर्ष हो चुका है। जहां इस दौरान अक्सर कई तरह के रिपोर्ट्स में यह खुलासा होता रहा है कि बार्डर पर चीन की नियत ठीक नहीं है। यही कारण है कि भारतीय सेना भी बार्डर सेक्टर में अपनी पोजीशन बहुत मजबूत करने में लगातार जुटी हुई हैं ताकि दुश्मन को समय आने पर माकूल जवाब दिया जा सके।
