
सांकेतिक तस्वीर।
तेजपुर। म्यामांर में सेना की तरफ से विद्रोही संगठनों पर की जा रही हवाई हमले अब लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जहां इन्हें रोकने के लिए अब कई मानवाधिकार संगठनों और दुनिया के कई देशों ने म्यांमार को जेट फ्यूल देने पर ही बैन लगाने की मांग की है। दरअसल पिछले साल नवंबर के महीने में म्यांमार की सेना पर आरोप लगे थे कि वो सिविल एयरलाइन के लिए मिलने वाले जेट फ्यूल का इस्तेमाल भी अपने हमलों के लिए कर रही है।
दरअसल,म्यामांर में हवाई हमले रोज की कहानी बनते जा रहे हैं। सेना अपने विरोधियों को ढूंढ़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसके चलते वो आम लोगों को निशाना बना रही है। म्यामांर विटनेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 6 महीनों में वहां 135 इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। मालूम हो कि साल 2021 में सेना ने वहां चुनी हुई आंग सान सू की सरकार को गिरा दिया था और उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया था। तब से लोग अलग-अलग तरीकों से सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इतना ही नहीं इस विरोध को रोकने के लिए सेना लगातार आक्रामक है।
हाल ही में UN ने भी अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि म्यांमार अपने ही लोगों को मारने के लिए तेजी से अपने हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। म्यांमार पाबंदियों के कारण दूसरे देशों से हथियार नहीं खरीद सकता है। इसके चलते वो खुद अपने हथियार बना रहा है। जहां इस काम में भारत, अमेरिका और जापान समेत 13 देशों की कंपनियां म्यांमार का साथ दे रही हैं।
