स्पेशल रिपोर्ट

मेड इन इंडिया के युध्दपोत पर इंडियन नेवी के बहादुर पायलटों ने पहली बार लड़ाकूं विमानों का किया सफल टेक आॅफ और लैंडिंग, ऐडमिरल ने बड़ी उपलब्धि का किया ऐतिहसिक दावा – गौरव बरनवाल (डिप्टी एडिटर)


इंडियन नेवी का मिग -29K एअरक्राफ्ट जेट INS विक्रांत युध्दपोत से सफल उड़ान भरने के दौरान,फोटो साभार -(इंडियन नेवी के वेस्टर्न नेवल कमांड के ट्वीटर से)

नई दिल्ली। इंडियन नेवी के बहादुर सैन्य पायलटों ने सोमवार को भारतीय नौसेना के “आत्मनिर्भर” अभियान में एक ऐतिहासिक मिसाल कायम किया है। बता दे कि पहली बार नौसेना के पायलटों ने मेड इन इंडिया INS विक्रांत पर दो लड़ाकूं विमानों की सफल लैंडिंग किया है। जहां इस पूरे आॅपरेशन को लेकर भारतीय नौसेना ने बयान जारी कर बताया कि हमने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और मिग-29K से सफल टेक ऑफ और लैंडिंग की है। मालूम हो कि यह स्वदेशी लड़ाकूं विमान के साथ एयरक्राफ्ट कैरियर के डिजाइन, डेवलपमेंट, प्रोडक्शन और ऑपरेशन करने में भारत की ताकत को दिखाता है।

यही विमान इसी युध्दपोत पर सफल लैंडिंग करते हुए, फोटो साभार -(इंडियन नेवी के वेस्टर्न नेवल कमांड के ट्वीटर से)

भारतीय नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एस.एन. घोरमाडे के हवाले से दावा किया गया है कि यह ऐतिहासिक पल और बड़ी उपलब्धि है। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2 सितंबर 2022 को कोच्चि शिपयार्ड में भारत के पहले मेड इन इंडिया एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत को नौसेना में शामिल किया था। इसके साथ ही भारत 40000 टन से अधिक श्रेणी के एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की क्षमता रखने वाले देशों में शामिल हो गया। INS विक्रांत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड यानी CSL ने किया है। इसे वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जिसे पहले नौसेना डिजाइन निदेशालय के रूप में जाना जाता था। ये भारतीय नौसेना का इन-हाउस डिजाइन ऑर्गेनाइजेशन है। बताया जा रहा है कि 45 हजार टन वजनी INS विक्रांत भारत में बना सबसे बड़ा वॉरशिप है। ये INS विक्रमादित्य के बाद देश का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर है। मालूम हो कि विक्रमादित्य को रूसी प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया था।

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