एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

पाकिस्तान में जारी आत्मघाती हमलों से घबराये चीन ने बंद किया अपना काउंसलर आफिस, पहले भी कई हमलों में टारगेट हो चुके हैं चीनी नागरिक – हेमंत सिंह (स्पेशल एडिटर)


सांकेतिक तस्वीर।

इस्लामाबाद/बीजिंग। चीन के सबसे जिगरी दोस्त पाकिस्तान में लगातार विभिन्न विद्रोही संगठनों द्वारा टारगेट हो रहे चीनी नागरिकों के चलते बीजिंग ने इस्लामाबाद में अपना कॉन्स्युलर ऑफिस बुधवार को अचानक बंद कर दिया। जहां मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन ने यह निर्णय पाकिस्तान के विद्रोही संगठन “तहरीक-ए-तालिबान” पाकिस्तान (TTP) और बलोच लिबरेशन फ्रंट (BLA) से लगातार मिल रही हमलों की धमकियों के बाद लिया है।

दरअसल,हाल हीं में चीन ने पाकिस्तान में रह रहे अपने नागरिकों को एक सख्त एडवाइजरी जारी की थी। जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान में सिक्योरिटी के हालात खराब हैं और वहां रहना खतरनाक है। लिहाजा, अपनी सुरक्षा का खास ख्याल रखें। इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है था कि चीन इस्लामाबाद में मौजूद अपनी एम्बेसी की हिफाजत को लेकर परेशान है और वह कोई सख्त कदम उठा सकता है। इसके बाद बुधवार को एम्बेसी ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी किया और कहा कि कॉन्स्युलर सेक्शन बंद किया जा रहा है। हालांकि, इसकी वजह नहीं बताई गई। वहीं चीन के इस कार्यवाही के बाद पाकिस्तान की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बता दे कि पिछले महीने इस्लामाबाद में तालिबान के एक फिदायीन हमलावर को पुलिस ने रेड सिक्योरिटी जोन में रोकने की कोशिश की थी। इसके बाद उसने खुद को उड़ा लिया था। हमले में दो पुलिस अफसर मारे गए थे,इसके बाद पेशावर की पुलिस लाइन्स की मस्जिद में फिदायीन हमला हुआ था और वहां 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। चूंकि चीन ने करीब 60 अरब डॉलर पाकिस्तान में CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) पर खर्च करने का प्लान बनाया है। जो कि कई साल से यह प्रोजेक्ट चल रहा है और अब तक इस पर करीब 40 अरब डॉलर खर्च भी हो चुके हैं।

और CPEC का बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान प्रांत से गुजरता है। जो कि यहां बलोच लिबरेशन फ्रंट (BLA) की हुकूमत चलती है और यह संगठन पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहा है। यहीं कारण है कि पिछले साल BLA ने चीनी इंजीनियरों को दासू डैम प्रोजेक्ट साइट पर ले जा रही बस को उड़ा दिया था। इसमें 9 इंजीनियरों समेत कुल 13 लोग मारे गए थे। इसके बाद पिछले ही साल कराची यूनिवर्सिटी में चीन की महिला प्रोफेसरों की वैन पर BLA की महिला फिदायीन ने हमला किया था। इसमें 6 लोग मारे गए थे। इनमें से 5 चीनी थे। पेशावर और क्वेटा में चीनी अफसरों पर 4 हमले हुए। कुल 7 चीनी मारे गए। इतना ही नहीं चीन की दिक्कत इसलिए बढ़ गई कि पाकिस्तान के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी ने BLA से हाथ मिला लिया है। अब चीनियों पर खतरा कई गुना बढ़ गया है। हालांकि, पाकिस्तान में लगातार बढ़ते आत्मघाती हमलों के कारण अकेला चीन हीं नहीं प्रभावित हुआ है, साथ में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब ने भी अपने नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा न करने की सलाह देते हुए कहा था कि वहां सिक्योरिटी के हालात हर दिन बिगड़ रहे हैं।

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