इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

चीन के जासूसी गुब्बारे से जुड़े खुलासों पर भारत ने क्यों साधी चुप्पी ? – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


फाईल फोटो।

वाशिंग्टन/नई दिल्ली। जबसे अमेरिकी एअर स्पेस में चीन का जासूसी गुब्बारा डिटेक्ट हुआ और उसके बाद उसे शूट किया गया उसके बाद से ही इस घटनाक्रम में आये दिन बेहद चौंकाने वाले खुलासे होते ही जा रहे हैं। जहां इन खुलासों में भारत का भी नाम सामने आया है। जिसमें दावा किया गया कि पिछले साल भारत के अंडमान के पोर्ट ब्लेयर के सैन्य ठिकानों के उपर भी इसी तरह का गुब्बारा देखा गया था, जिसको लेकर एक स्थानीय मीडिया समूह ने उस समय सवाल भी खड़ा किया था।

दरअसल,हाल हीं में अमेरिका के आसमान में चीन का एक जासूसी गुब्बारा देखा गया था, जहां उसे आमलोगो के बीच से हटाकर समंदर के उपर हिट किया गया और जांच के दौरान यह पाया गया कि इस गुब्बारे में जासूसी उपकरण के साथ घातक विस्फोटक भी मौजूद था जो कि खुद को नष्ट करने में सक्षम था। इतना ही नहीं अमेरिकी ऐजेंसियों ने यहां तक दावा किया कि इस गुब्बारे को चीनी सेना दक्षिण सागर के हेनान द्वीप से आॅपरेट कर रही थी। वहीं,चीन वाशिंग्टन के इस दावें से कतई सहमत नहीं है, उसका यही कहना है कि यह मौसम के अध्ययन के लिए आसमान में छोड़ा गया था जो कि भटककर अमेरिकी स्पेस में पहुँच गया। हालांकि, विशेषज्ञ चीन के इस दलील को खारिज करते हुए कई तरह के सवाल खड़ा कर रहे हैं, जिससे साफ हो जाता है कि चीन झूठ बोल रहा है।

इस बीच इस गुब्बारे से जुड़े कई खुलासे होने लगे,यहां तक कि दावा किया गया कि चीन इस तरह से पिछले कई सालों से जासूसी कर रहा है। इस बीच यह भी कहा गया कि चीन अपने तमाम दुश्मन देशों में भी इस तरह के कई गुब्बारों को छोड़ा है। जिसमें भारत का भी नाम शामिल हैं। भारत के बारे में बताया गया कि पिछले साल अंडमान के पोर्ट ब्लेयर के सैन्य ठिकानों के उपर भी इसी तरह का गुब्बारा देखा गया था। जहां उस समय एक स्थानीय मीडिया समूह ने इस पर सवाल खड़ा किया था, लेकिन तब भारतीय ऐजेंसियों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उस समय भारतीय ऐजेंसियां क्या कर रही थी ? और आज जब इस खुलासे को अमेरिका पूरी जिम्मेदारी के साथ पब्लिक कर रहा है तो भारत की डिफेंस मिनिस्ट्री और होम मिनिस्ट्री के साथ अन्य ऐजेंसियां भी अभी तक खामोश क्यों है ? जबकि इस पूरे घटनाक्रम पर भारत को एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करनी चाहिए, अफसोस अभी तक ऐसी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। बेहद हैरानी होती है कि इतना गंभीर विषय जो कि सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इस पर सब मौन धारण किये हुए हैं।

गौरतलब है कि इस फरवरी के पहले सप्ताह में अमेरिका के आसमान में चीन के जासूसी गुब्बारे की रिपोर्ट सामने आई थी जहां कई तरह से उसकी निगरानी के बाद उसे समुंदर के उपर हिट किया गया, उसके मलबों की शुरूआती जांच में यह साफ हो गया कि यह सामान्य गुब्बारा नहीं बल्कि जासूसी गुब्बारा है जिसे चीनी सेना हेनान द्वीप से आॅपरेट कर रही थी। इस बीच अमेरिका के कई हिस्सों में भी इसी तरह के कई तरह के गुब्बारे देखे गए, इतना ही नहीं कई तरह के संदिग्ध आॅब्जेक्ट भी देखे गए जिसे बिना देर किये पेंटागन के निर्देश पर अमेरिकी लड़ाकूं विमानों ने शूट कर दिया, जहां इसके मलबों की भी जांच की जा रही है। वहीं, इस दौरान चीन ने भी इसी तरह के दावें किया, जिसे पेंटागन ने खारिज कर दिया।

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