
सांकेतिक तस्वीर।
रियाद/तेहरान। दशकों से सऊदी और ईरान के बीच जारी भीषण तनातनी अब सुलह के कगार पर होने की रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि, यह सुलह मिडिल-ईस्ट में इजरायल और अमेरिका के लिए सबसे बड़े झटके के तौर पर साबित होगा। क्योंकि,ईरान के सबसे बड़े दुश्मन इजरायल और अमेरिका यह कभी नहीं चाहेंगे कि उनके सबसे मजबूत करीबी देश सऊदी के साथ ईरान का सुलह हो। दरअसल,रिपोर्ट है इस सुलह में अहम भूमिका चीन ने निभाई है,दावा है कि बीजिंग ने पर्दे के पीछे से इस मिशन को अंजाम दिया है। बता दे कि वर्ष 2016 के बाद दोनों देश एक-दूसरे के मुल्क में अपनी-अपनी एम्बेसी फिर खोलने के लिए राजी हो गए हैं।
इस बीच अमेरिकी टीवी चैनल CNN के हवाले से यह रिपोर्ट किया गया है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच यह बातचीत कई महीने से चीन की राजधानी बीजिंग के एक होटल में चल रही थी। हालांकि, चीन और सऊदी अरब ने अब तक इस बारे में ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी नहीं किया है। वहीं,ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने भी खुलासा किया है कि मुल्क की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली शमकहानी की चीन में अपने काउंटरपार्ट मोसेद बिन मोहम्मद अल एबान से मुलाकात हुई। इस दौरान एग्रीमेंट पर सिग्नेचर किए गए।
इस मामले में हैरान करने वाली बात ये है कि ईरान की तरफ से बयान जारी किए जाने के कई घंटे बाद भी सऊदी अरब, चीन और अमेरिका ने खामोश रहे। इसके कई मायने हैं। दरअसल, सऊदी सरकार को डर है कि चीन की वजह से हुए इस समझौते से अमेरिका नाराज हो सकता है, क्योंकि उसे इस मामले में उस सऊदी सरकार ने अंधेरे में रखा, जिसके 90% हथियार और तमाम टेक्नोलॉजी अमेरिका की ही है। इतना ही नहीं चीन ने भी शायद इसलिए बयान जारी नहीं किया, क्योंकि उसको लगता है कि अमेरिका उसके विरोधियों को अब खुलकर साथ दे सकता है। खासतौर से साउथ चाइना सी और हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में। ताइवान में तो अमेरिकी वॉरशिप पहले ही तैनात कर दिए गए है।
वहीं, तेल अवीव और वाशिंग्टन ने इस पूरे मुद्दे पर अभी तक चुप्पी साध रखे हुए हैं। कूटनीतिक भाषा में इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका और इजरायल की सबसे बड़ी हार है। अब इजरायल और अमेरिका आगे क्या रणनीति अमल में लाते है ? यह अभी नहीं मालूम, लेकिन यह बड़ा फेलयोर है। गौरतलब है कि परमाणु हथियारों के परीक्षण सहित कई मुद्दों पर ईरान का अमेरिका, इजरायल और सऊदी के साथ दशकों से भीषण तनाव था। लेकिन अब सऊदी के साथ ईरान का यह समझौता इजरायल और अमेरिका के लिए सबसे बड़ा झटका हैं।
