
सांकेतिक तस्वीर।
तेहरान/वॉशिंगटन। दुनिया के कई मोर्चों पर जारी भीषण जंगी तनातनी के बीच अब खाड़ी क्षेत्र में भी अमेरिका द्वारा लगातार मिलिट्री बढ़ाने की रिपोर्ट सामने आई है। जिससे ईरान के साथ टकराव खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। दरअसल,इस जंगी तनातनी बढ़ने के पीछे यूं तो पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच कई कारण है,लेकिन यह ताजा घटनाक्रम उस समय घटा है जब पिछले हफ्ते पेंटागन की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे शिपिंग लेन को ईरान से से बचाने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने का फैसला लिया गया।
इस बीच कुछ विदेशी मीडिया समूह ने भी रिपोर्ट किया है कि अमेरिका की सेना होर्मुज से गुजरने वाले कर्मशियल जहाजों पर सशस्त्र सैनिकों को तैनात करने का मन बना रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वाकई ऐसा होता है तो फिर यह एक असाधारण कदम होगा। वहीं,तेहरान भी अब आक्रामक दिख रहा है, जहां ईरान की तरफ से कहा गया है कि वह अमेरिका के इस फैसले के जवाब में अपनी रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना को ड्रोन और मिसाइलों से लैस करेगा।
दरअसल,इस ताजे घटना के पीछे बड़ी वजह यह है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने खाड़ी से जाने वाले कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को जब्त कर लिया है। इस बीच विशेषज्ञों का कहना है कि रणनीतिक जलक्षेत्र सीमा में ईरान का हालिया व्यवहार अमेरिका की तरफ से ईरानी तेल टैंकर को जब्त करने के बाद आया है। बता दे कि यह टैंकर फिलहाल टेक्सास के तट से दूर है। वहीं,कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि कई अमेरिकी तेल कंपनियां खाड़ी में अपने जहाजों के खिलाफ ईरान के बदले के डर से जब्त किए गए तेल के लिए बोली लगाने से इनकार कर रही हैं। जिससे हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों देश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे दूसरे पक्ष के आक्रामक कदमों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
