
सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली। बीते 7 अक्टूबर को जबसे हमास की तरफ से इजरायल के उपर हमला हुआ है, उसके बाद से हीं दुनिया भर के तमाम मीडिया हाउस और तमाम तरह के विशेषज्ञों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि इजरायल के सहयोगी अमेरिका,नाटों के खिलाफ रूस और चीन भी इस जंग में उतर सकते हैं, हालांकि इस तरह के दावें को बल तब मिलने लगा जब रूस ने इस जंग के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया, इतना ही नहीं फिलिस्तीन को समर्थन देने का भी संकेत दिया है। इतना ही नहीं इस दावें की प्रमाणिकता में चार चांद तब और भी लग जाते हैं जब चेचन प्रमुख भी हमास की मदद करने के लिए खुला आफर देता है। इस बीच सीरिया के भी इस लड़ाई में शामिल हो जाने से करीब-करीब पूरी तस्वीर ही साफ हो जाती है कि रूस और चीन हर हाल में संयुक्त रूप से अमेरिका और नाटों के खिलाफ इस लड़ाई को ज्वाईन करेंगे।
हालांकि, रूस और चीन को लेकर जिस तरह से दावें और आशंकाए जाहिर की जा रही है, उसके लिए कई तरह के कारण भी काफी है। जिनमे रूस-यूक्रेन जंग प्रमुख रूप से है। जहां इन्ही सभी कारणों से दुनिया का एक बड़ा वर्ग तीसरे विश्वयुद्ध की कल्पना को सच मान बैठा है। लेकिन उल्लिखित तमाम दावों और आशंकाओं का हमने बेहद सूक्षमता से अध्ययन व विश्लेषण किया तो हमने पाया कि ये सभी दावें और आशंकाए सिर्फ और सिर्फ कपोल कल्पित मात्र हीं है।
क्योंकि, शीतयुद्ध के दौरान रूस ने तमाम लड़ाईयां लड़ी जहां चीन भी शामिल रहा है, लेकिन इस दौरान नाटों के खिलाफ रूस ने आज तक किसी भी आतंकी समूह का किसी भी तरह का कोई मदद नहीं किया,जबकि इस तरह के मामलों में चीन का दामन पाक-साफ नही है,क्योंकि चीन पर यह आरोप लगता रहा है कि वह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भारत विरोधी तमाम संगठनों को खड़ा करता रहा है, इतना ही नहीं इन विरोधी समूहों को सभी तरह की मदद भी पहुंचाता रहा है, हालांकि,भारत इन समूहों पर करीब-करीब पूरी तरह से हावी चुका है,अपवाद के तौर पर ये चीन पोषित कुछ विद्रोही समूह आज भी उन इलाकों सक्रिय है। वहीं,रूस के खिलाफ इस तरह के मौकों को नाटों ने कभी नही गंवाया, यानि जो भी आतंकी समूह रुस या रूस समर्थित देशों के खिलाफ लड़ते रहे हैं उन सभी ऐसे समूहों को नाटों और अमेरिका ने तमाम तरह की सैन्य मदद दिया है। इसके एक दो नहीं तमाम उदाहरण हैं, जैसे अफगानिस्तान में जब रूस रहा तो उसके खिलाफ तालिबान को खड़ा करने में अमेरिका का बहुत बड़ा रोल रहा है, फिर चेचन्या का विद्रोह हो या सीरिया में जारी गृहयुद्ध, इन सभी में अमेरिका ने पूरा लाभ उठाया।
लेकिन इस तरह की हरकतों से रूस अभी तक बचता रहा है। यानि शीतयुद्ध के दौर से लेकर आज तक एक भी ऐसी रिपोर्ट्स सामने नहीं आई जिससे यह साफ हो सके कि रूस नाटों के खिलाफ ऐसे किसी आतंकी समूहों की कभी मदद किया हो,दरअसल रूस की साफ नीति रही है कि वह सीधे जंग लड़ने से कभी पीछे नहीं हटता, जबकि नाटों की ऐसी पॉलिसी नहीं रही है। जहां इन तमाम तथ्यों और विश्लेषण के आधार पर “सीक्रेट आपरेशन” न्यूज पोर्टल समूह पूरी जिम्मेदारी के साथ दावा करता है कि अमेरिका और नाटों के खिलाफ “हमास” और “हिजबुल्लाह” जैसे आतंकी समूहों की रूस किसी भी तरह से कोई मदद कभी नहीं करेगा,लेकिन कूटनीतिक स्तर पर फिलिस्तीन का समर्थन करता रहेगा। रही बात चीन की तो वह भी इस मुद्दे पर क्रेमलिन को हीं फालो करेगा।
उल्लेखनीय हैं कि अभी तक “सीक्रेट आपरेशन” मीडिया हाउस के इस तरह के तमाम दावे और खुलासे करीब-करीब सौ फीसदी सच साबित होते रहे हैं। मसलन जब पूरी दुनिया 1 मार्च 2022 को यह दावा कर रही थी कि 64 किलोमीटर की रूसी कानवाई यूक्रेन की राजधानी को फतह कर लेगी,और 2 मार्च का सुबह का सूरज यूक्रेन नहीं देखेगा। यानि साफ तौर पर कहा गया था कि यूक्रेन पूरी तरह से हार जायेगा। तब इस दावें को उस वक्त “सीक्रेट आपरेशन” मीडिया समूह ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि 2 मार्च का सुबह का सूरज यूक्रेन देखेगा और यह लड़ाई लंबे समय तक चलेगी। और आज तक यह लड़ाई चल ही रही है जो कि हमारा यह दावा सौ फीसदी सच साबित हुआ। इसी तरह के और भी हमारे दावें सौ फीसदी सच साबित रहे हैं।
