पाकिस्तान के एक पूर्व सांसद ने देश के जनरलों पर तालिबान को पूरी तरह से समर्थन देने का आरोप लगाया है। अवामी नेशनल पार्टी (ANP) के सदस्य अफरासियाब खट्टक ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कब्जे से पाकिस्तान बहुत खुश है।
BBC को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि तालिबान अफगानिस्तान में पाकिस्तान की रणनीति का इंस्ट्रूमेंट बनने वाला है। अफगानिस्तान के लिए नीतियां बनाने में पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार की कोई भूमिका नहीं रह गई है।
तालिबान के हथियारों पर मेड इन पाकिस्तान लिखा है
खट्टर का ट्विटर एकाउंट अफगानिस्तान के हालात पर ट्वीट और रीट्वीट से भरा हुआ है। उन्होंने 11 अगस्त को ट्वीट किया, ‘तालिबान के पास जो हथियार और गोला-बारूद हैं उस पर मेड इन पाकिस्तान लिखा है। तालिबानी लड़ाके पूरी तरह से पाकिस्तान से मिलने वाली ट्रेनिंग, सप्लाई और शरण पर निर्भर हैं। अफगान सेनाएं इन दिनों बिना किसी विदेशी मदद के लड़ रही हैं, जैसा कि पहले कभी नहीं देखा गया। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।’
हमले में मारे गए आतंकियों में 30 पाकिस्तानी मिले
तालिबान के कब्जे से शहरों को छुड़ाने के लिए अफगान सेना ने पिछले शुक्रवार को ऑपरेशन चलाकर 385 तालिबानी आतंकी मार गिराए थे। खास बात यह है कि मारे गए आतंकियों में 30 पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल हैं। यह जानकारी अफगानिस्तान की सेना से जुड़े अधिकारियों से साझा की। इसके बाद अब अफगानिस्तान के उन दावों को बल मिल गया है, जिसमें वहां की सरकार ने पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने का आरोप लगाया था।
‘पाकिस्तान के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं’
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र (UN) में अफगानिस्तान के स्थाई दूत गुलाम इसाकजई कहा था कि उनके पास पाकिस्तान के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। वहां की सरकार तालिबान के आतंकियों को हथियारों के जरूरत का सामान सप्लाई कर रही है। अगर UN हमसे सबूत मांगता है तो हम सबूत दिखा सकते हैं।
इसाकजई ने कहा था कि हम पाकिस्तान की सरकार से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और उनके सामने सबूतों के साथ अपना विरोध दर्ज करा चुके है। अफगानिस्तान की सरकार पाकिस्तान पर उनके देश में आतंक फैलाने और तालिबान को सपोर्ट करने का आरोप लगाती आई है।
अफगानिस्तान के अब तक 12 प्रांतों पर तालिबान का कब्जा
तालिबान ने अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर कब्जा कर लिया है। न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक तालिबान अब तक 34 में से 12 प्रांतों पर अपनी हुकूमत कायम कर चुका है। कंधार पर तालिबान ने गुरुवार देर रात कब्जा किया।
एक महीने में काबुल भी कब्जा सकता है तालिबान
अमेरिका की बाइडेन सरकार को आशंका है कि एक महीने के भीतर काबुल पर भी तालिबान का कब्जा हो जाएगा और अफगान सरकार गिर जाएगी। ऐसे में अमेरिका ने अफगानिस्तान में मौजूद अपने नागरिकों को निकालने की तैयारी कर ली है। इसके लिए अमेरिका अपने 3 हजार सैनिकों को वापस अफगानिस्तान में भेज रहा है।
